डॉ. सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज के आईसीयू वार्ड में ताला बंद है। कोरोना काल में मिले आठ वेंटीलेटर धूल खा रहे हैं। ऐसे में दमा, ब्रेन हेमरेज दिल के रोगियों गंभीर स्थिति में इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। अफसरों के मुताबिक ऑपरेटर नहीं हैं, इसलिए आईसीयू के संचालन में मुश्किल हो रही है।
जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के बाद चिल्ड्रेन वार्ड को आईसीयू वार्ड में तब्दील किया गया था। कोरोना काल में यहां गंभीर मरीजों के बेहतर उपचार के लिए आठ वेंटीलेटर उपलब्ध कराए गए थे। आईसीयू वार्ड में वेंटीलेटर समेत अन्य चिकित्सकीय सुविधाएं तो हैं, लेकिन गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। आईसीयू वार्ड को एक नहीं बल्कि दो ताले लगाकर बंद कर दिया गया है। इस कारण मरीज तो दूर विभाग के कर्मचारी भी वहां नहीं पहुंच पाते।
सर्दी के मौसम में दमा रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ओपीडी से लेकर वार्ड तक वायरल बुखार के साथ दमा रोगी उपचार कराने आ रहे हैं। मंगलवार को भी मेडिकल वार्ड में सात दमा रोगी भर्ती हुए। ओपीडी में 69 मरीजों का उपचार किया गया। गंभीर मरीजों को आईसीयू में ऑक्सीजन के बाद वेंटीलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है।
आईसीयू बंद होने की वजह से गंभीर मरीजों को तीमारदार प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल या लखनऊ ले जाने को मजबूर हो रहे हैं।
राजा प्रताप बहादुर अस्पताल के डॉ. मनोज खत्री के मुताबिक ठंड के मौसम में दमा रोगियों के साथ ब्रेन हैमरेज, दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए वेंटीलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है।
वेंटीलेटर से सुसज्जित वार्ड नए भवन में संचालित किया जाएगा। जिस वार्ड को आईसीयू में तब्दील किया गया था, वहां स्थान की कमी है। मरीजों को जल्द ही सभी सुविधाओं के साथ आईसीयू में भर्ती कराने की व्यवस्था की जा रही है।
डॉ. आर्यदेश दीपक, प्राचार्य, मेडिकल कालेज