दिवाली के मद्देनजर दीया बनाता कुम्हार।
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तकनीक कुम्हारों की भी किस्मत बदल रही है। उनकी निर्माण क्षमता में तेजी आई है। इसी का नतीजा है कि इस बार सई नदी के तट पर बसे मिट्टी के जादूगर ज्यादा मात्रा में दीये तैयार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि भगवान राम की नगरी अयोध्या में सरयू के तट पर सई की मिट्टी से बने दीये भी रोशन होंगे। वे इंतजार में हैं।
दिवाली पर बिजली की झालरें भले रोशनी बिखेरें। मिट्टी का दीये में जलता दीपक अलग ही नजर आता है। कोरोना काल में जरूर परेशानी हुई थी लेकिन बाद में स्थितियां बदलीं। मिट्टी के दीयों का क्रेज बरकरार है। अयोध्या में जलने वाले दीयों के लिए प्रतापगढ़ को भी कुछ ऑर्डर मिल सकते हैं। पांच लाख का दीयों का अनुमान है। इलेक्ट्रानिक चाक की बदौलत कुम्हारों ने अच्छी आमदनी की आस लगा रखी है।