जिले में एचआईवी जांच की इंफार्मेटिक किट खत्म हो गई है। जिससे मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट सेंटर जाना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज समेत पांच सरकारी अस्पतालों में एचआईवी की जांच नहीं हो पा रही है।
अमूमन गर्भवती महिलाओं के अलावा ऑपरेशन वाले मरीजों की एचआईवी जांच कराई जाती है। कई दिनों से बुखार समेत अन्य लक्षणों को देखते हुए भी चिकित्सक मरीजों को एचआईवी की जांच कराने की सलाह देते हैं।
डॉ. सोनेलाल पटेल राजकीय मेडिकल कॉलेज के राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय, लालगंज, कुंडा, रानीगंज और पट्टी सीएचसी में भी एचआईवी की जांच होती है। तीन दिनों से एचआईवी जांच की इंफार्मेटिक किट खत्म हो गई है। जिससे जांच नहीं हो पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार औसतन हर दिन मेडिकल कालेज समेत अन्य अस्पालों में 50 से अधिक मरीजों की एचआईवी जांच होती है। तीन दिन से जांच बंद होने के कारण मरीजों को प्राइवेट सेंटर जाना पड़ रहा है।महिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली मरीजों की पहले ही एचआईवी जांच करा ली जाती है।
सबसे अधिक परेशानी प्रताप बहादुर अस्पताल में हार्निया, पथरी समेत अन्य आपरेशन कराने वाले मरीजों को हो रही है। दहिलामऊ निवासी संगम वर्मा अपने भाई रोहित का आपरेशन कराने के लिए सर्जन को दिखाया। एचआईवी जांच नहीं हो सकी। जिसके चलते उसने भाई का ऑपरेशन टाल दिया। बुधवार को ऑपेरशन कराने के लिए चार मरीजों ने निजी केंद्रों पर जांच कराई।
बाहर जांच के लिए देने होते हैं 350 रुपये
मेडिकल कॉलेज समेत तहसील स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की एचआईवी जांच नि:शुल्क होती है। प्राइवेट सेंटरों पर एचआईवी की जांच कराने के एवज में 350 रुपये देने होते हैं। किट समाप्त होने के बाद मरीज बाहर से जांच कराने को मजबूर हैं।
एचआईवी की जांच के लिए प्रयोग होने वाली इंफार्मेटिक किट समाप्त है। जिसके लिए डिमांड भेजी गई है। जल्द ही किट आने की उम्मीद है। अब जरूरत के हिसाब से मरीज जांच करा रहे हैं। डॉ. सुरेश सिंह, सीएमएस, राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय