जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में शिक्षक - शिक्षिकाओं की भारी कमी है। 15 आवासीय स्कूलों में 68 शिक्षिकाओं की भर्ती के लिए विज्ञापन तो जारी किए गए, मगर इसके बाद की कार्रवाई ठप हो गई है। इससे बालिकाओं का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। बालिकाओं को गुणात्मक शिक्षा और कौशल विकास का ज्ञान देने के लिए जिले के 15 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल खोले गए हैं। ग्रामीण इलाकों में खुले इन स्कूलों में सिर्फ बालिकाओं को ही शिक्षा प्रदान की जाती है। स्कूल भवन में ही बच्चों के रहने की व्यवस्था की गई है। कस्तूरबा गांधी स्कूलों को 65-65 लाख रुपये से निर्मित निजी भवन तो मिल गए हैं, मगर शिक्षक-शिक्षिकाओं की कमी के चलते पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। स्कूलों में जो पद खाली हैं, उनमें से अधिकांश विज्ञान, गणित और अंग्रेजी के शिक्षकों के हैं।
सात कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल ऐसे हैं, जिसमें तीन साल से स्थायी वार्डेन नहीं है। इन स्कूलों को प्रभारी टीचर से चलाया जा रहा है।