शुक्रवार को दमा से पीड़ित एक रिटायर्ड दरोगा जिला अस्पताल में पांच घंटे तक बिना ऑक्सीजन के तड़पता रहा। उसके बेटे का आरोप है कि बार-बार कहने के बाद भी उसे आक्सीजन नहीं दी गई। डाक्टर ऑक्सीजन न होने की बात कहते हुए उसे रेफर करने की बात कहने लगे। ‘अमर उजाला’ टीम जब पड़ताल करने पहुंची तो रात साढ़े आठ बजे आननफानन में पाइप लाइन से ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की गई। हालांकि जिला अस्पताल प्रशासन इन बातों को खारिज करता रहा। उसका कहना था कि जानकारी होने पर ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी गई थी। जेठवारा इलाके के उदापुर निवासी रिटायर्ड दरोगा महेंद्र प्रताप सिंह को दमा की बीमारी है। शुक्रवार को उनको सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इस पर बेटा यशवंत सिंह उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। दोपहर करीब दो बजे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में उन्हें भर्ती किया गया। चिकित्सकों ने बाद में मेडिकल वार्ड भेज दिया। सांस लेने में हो रही तकलीफ को देखते हुए डाक्टरों ने नर्स को ऑक्सीजन लगाने के लिए कहा। यशवंत का आरोप है कि नर्स ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आई, लेकिन लगाते ही वह खत्म हो गया। इसकी शिकायत लेकर वह चिकित्सक के पास पहुंचा। इस पर डाक्टर महेंद्र को रेफर करने लगे, लेकिन यशवंत अकेले होने के कारण पिता को इलाहाबाद नहीं ले जा सका। पांच घंटे तक वह तड़पते रहे, लेकिन पाइप लाइन से ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं शुरू की गई। रात साढ़े आठ बजे डॉक्टर आरडी द्विवेदी राउंड पर आए तो यशवंत ने उन्हें मामले की जानकारी दी। इस पर उन्होंने गार्ड को भेजकर पाइप लाइन में ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कराई। तब जाकर महेंद्र को ऑक्सीजन लगाई जा सकी। उधर, अस्पताल प्रशासन इससे इनकार करता रहा। उसका कहना था कि डाक्टर किसी और कारण से रेफर कर रहे थे जिला अस्पताल में 60 ऑक्सीजन सिलेंडर रखे हैं। इन दिनों 25 से अधिक सिलेंडर खाली पड़े हैं। इससे दमा के मरीजों को परेशान होना पड़ता है। चिल्ड्रेन वार्ड में एक भी ऑक्सीजन सिलेंडर भरा हुआ नहीं रखा है। दो सिलेंडर हैं भी तो दोनों खाली पड़े हैं।