पहले से ही खौफ के साए में जी रहे ग्रामीणों के सामने अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है। देर शाम हुई घटना की खबर कई गांवों में आग की तरह फैली। लोगों ने फोन के माध्यम से सभी को सतर्क रहने का संदेश दे दिया है। इसके पहले भी जंगल की तरफ खेतों की रखवाली करने और जानवर चराने के लिए जाने में ग्रामीण हिचक रहे थे।
नवाबगंज थाना क्षेत्र का सोनामऊ गांव कछार के जंगल से लगा हुआ है। इसमें रहने वाले लोगों के खेत भी जंगलों से लगे हुए हैें। ऐसे उन्हें शौच से लेकर, खेत की रखवाली और जानवर आदि चराने के लिए जंगलों में जाना पड़ता है। दो दिन से वन विभाग की टीम ने सभी को उस तरफ जाने से सतर्क कर दिया था। इसके चलते ग्रामीणों ने जंगल की तरफ जाना बंद कर दिया था।
गांव के दयाराम, संगम यादव, कल्पनाथ, अमर सिंह, सुरेश यादव, अवनीश, रंजीत, श्यामू, रामसुमेर पटेल आदि का कहना है कि उनके खेतों को नीलगाय नुकसान न पहुंचाए इसलिए वे खेतों की रखवाली रात में जाकर करते थे। अब बाहर निकलने में ही डर लग रहा है। यही जानवरों को चरने के लिए भी नहीं भेजा जा रहा है। अब तो शौच के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। देर शाम हमले की खबर से सभी के होश उड़े हुए हैं। आसपास के लोग फोन के माध्यम से जानकारी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने रात में अलाव जलाकर और रतजगा करने की योजना बनाई है। यही नहीं एक घर में दो से तीन अलाव जलाए गए हैं। खासतौर से जानवरों की सुरक्षा को लोग चिंतित नजर आ रहे हैं।
गांव के लोगों के सामने शौच सहित रात में आने जाने को खड़ी हुई परेशानी को देखते हुए समूह में चलने की नसीहत दी जा रही है। गांव के बुजुर्ग किसी के भी अंधेरा या फिर दिन में चलने के लिए कई लोगों को एक साथ मिलकर जाने की बात कह रहे हैं। शाम को यदि कोई बाजार आदि से देरी से लौट रहा है तो उसे लेने के लिए दो चार लोग लाठी डंडे के साथ पहुंच रहे हैं।