गर्मी इन दिनों अपना कहर बरपा रही है। अत्यधिक गर्मी और लू की चपेट में आने से तीन दिन के भीतर मेडिकल कॉलेज में 18 रोगियों की मौत हो गई। राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड भी रोगियों से भरे हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक तपिश बढ़ने की वजह से पंखों से भी गर्म हवा निकल रही हैं। दीवारें भी तप रही है। इस कारण घर के अंदर भी लोगों को लू लग जा रही।
जिले में गर्मी की तपिश ने लोगों को बेहाल कर रखा है। सूर्य की गर्म किरणें सुबह से ही शरीर को भेदने लगती हैं। रविवार को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 36.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आसमान से जैसे आग बरस रही थी। उमस भरी गर्मी से व्याकुल लोग छांव और गला तर करने के लिए पानी खोजते रहे।
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के आंकड़ों के मुताबिक तीन दिन के भीतर 18 लोगों की मौत हुई। इन मौतों की वजह कहीं न कहीं गर्मी रही। 15 जून को राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में भर्ती हैंसी निवासी दयाशंकर, अंतू की रहने वाली कुंदनी की मौत हुई है।
16 जून को मिर्जा की बाग निवासी पप्पू , बैजलपुर के शिवशंकर, जेठवारा के रघुनाथपुर निवासी उमा देवी, लालगंज की सीता देवी समेत सात और 17 जून कंधई के करनपुर खूझी की रहने वाली किताबुल निशा, काशीराम काॅलोनी निवासी परमादेवी समेत छह लोग और 18 जून को भी शाम तक तीन लोगों की मौत हुई।
चिकित्सकों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने वाले मरीज किसी न किसी बीमारी से पहले से पीड़ित थे। तेज धूप और गर्मी से ऐसे लोग हीट स्ट्रोक की गिरफ्त में भी आए। मौत की एक वजह यह भी हो सकती है। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मनोज खत्री का कहना है कि मौजूदा समय में भीषण गर्मी का असर हर किसी पर पड़ रहा है। दमा, डायरिया बीमारी से पीड़ित लोगों की मौत की वजह गर्मी भी हो सकती है। लोगों को दोपहर में घर बाहर न निकलने और खाली पेट नहीं रहने की सलाह दी जा रही है।
लक्षण और बचाव
तेज धूप लगने पर शरीर में पानी की कमी (हीट एक्जर्शन) महसूस होने लगती है। इस वजह से प्यास बहुत लगती है। सिर दर्द शुरू हो जाता है। इसके अलावा उल्टी, चक्कर आना, बुखार व पसीना अधिक आना, इसके लक्षण हैं। कई लोग गर्मी की वजह से बेहोश भी हो जाते हैं, जिसे हीट सिंकोप कहा जाता है। लगातार या अधिक देर तक लू में रहने पर शरीर से पसीना आना बिल्कुल बंद हो जाता है। यह खतरे की घंटी है। यदि पसीना आना बंद हो जाए, तो समझ लें, यह हीट स्ट्रोक का लक्षण है। इससे किडनी, लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग खराब हो सकते हैं, यह जानलेवा हो सकता है।
बचाव के तरीके
बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं को धूप में अधिक नहीं निकलना चाहिए।
धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करना चाहिए। सिर व चेहरा कपड़े से ढंका होना चाहिए।
पर्याप्त मात्रा में पानी व जूस का इस्तेमाल करना चाहिए। कपड़े ढीले पहनने चाहिए।
धूप से आंखों के बचाव के लिए काले चश्मे का इस्तेमाल कर सकते हैं।
फलों का जूस, नारियल पानी, सतू, बेल का शरबत, छाछ आदि के इस्तेमाल से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।
इन दिनों कामकाज के समय को थोड़ा बदल सकते हैं। जिन लोगों को बाहर काम करने की विवशता है, वे दोपहर के बजाय सुबह व शाम के समय अपना काम कर सकते हैं।
0 एसी से निकलकर गर्म स्थान पर जाने से बचें
0धूप से आकर तुरंत फ्रिज का पानी न पीएं
0 पैरासिटामोल न लें, ठंडे पानी से स्नान करें
0 न पीएं रेहड़ी(ठेले) का पना
0 साफ करके ही खाएं फल
आसमान से बरसी आग, सड़कों पर सन्नाटा, पारा 44.4
रविवार को गर्मी की तपिश से हर कोई झुलसता रहा। तेज धूप के चलते सड़कों पर सन्नाटा पसरा। अधिकतम तापमान 44.4 और न्यूनतम 36.9 डिग्री दर्ज किया गया। इंसान के साथ पशु पक्षी भी गर्मी में बेहाल नजर आए। एसी व कूलर भी गर्मी से लोगों को राहत नहीं दे पा रहा था। शहर के साथ ही गांवों में भी लोग तेज धूप में बाहर निकलने से बचते रहे। गर्मी से बचने के लिए लोग छांछ, शरबत, दही, गन्ने के जूस का सेवन करते रहे। तपिश इस कदर रही कि सड़कें तवे की तरह आंच मार रही थीं। घरों की दीवारें गरम रहीं। पंखे की हवा गरम और कूलर बेअसर बने रहे।