कहला के शहीद मथुरा, कालिका, रामदास को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा, परिवार को सरकारी आवास नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
गौरा। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान रानीगंज के कहला में 16 फरवरी 1931 को सभा कर रहे किसानों पर अंधाधुंध फायरिंग में किसान रामदास, कालिका प्रसाद तथा मथुरा प्रसाद शहीद हो गए। देश आजाद होने के बाद सरकार की नाकामी से इन शहीदों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तक घोषित नहीं किया जा सका। इसके लिए हर वर्ष परिजनों को आश्वासन ही मिलता रहा।
कहला में शहीद रामदास के परिवार के लोगों की हालत देखकर हर कोई द्रवित हो उठता है। आज तक शहीद रामदास का परिवार झोपड़ी में गुजर बसर कर रहा है। इसके लिए उन्हें लोगों की बोलियां सुनने को मिलती हैं। शहीद रामदास की विधवा पुत्रवधू उर्मिला अपने तीन बेटे विकास, जयशिव, प्रद्युम्न व दो बेटियों के साथ झोपड़ी में रहने को मजबूर है। परिवार के लोगों का आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन सका।
शहीद रामदास के घर तक आने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है, जो खड़ंजा लगा है वह भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। देश के लिए हंसते-हंसते गोलियां खाने वाले शहीदों के परिजनों को इस बात का मलाल है कि केवल आश्वासन ही मिलता रहा लेकिन अभी तक उनके पुरखों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा नही मिल सका।
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नमक कानून, लगान का विरोध करने पर कहला में जुटे थे किसान
किसान आंदोलन के दौरान रानीगंज के कहला में दस हजार किसान एकत्र हुए थे। बाग के टीले पर सभा चल रही थी। तभी अंग्रेजी हुकूमत के आदेश पर सिपाहियों ने गोलियां बरसाई। उनकी गोलियों की परवाह किए बिना नाथ का पुरवा के किसान रामदास आगे बढ़े। सैनिकों ने उन्हें गोली मार दी जिससे कौलापुर के मथुरा प्रसाद और कहला के कालिका प्रसाद भी शहीद हो गए। सैनिकों की फायरिंग में निहत्थे सैकड़ों किसान घायल हुए थे।
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शहीद बाबा के सम्मान में मिलती है माला, शाल
कौलापुर निवासी कहला के शहीद मथुरा प्रसाद के पौत्र राम दुलार यादव अब बुजुर्ग हो चुके हैं। वह कहते हैं कि बाबा के सम्मान में जब कार्यक्रम होता है तो अधिकारी व जनप्रतिनिधि बुला लेते हैं। वहां माला, शाल देकर सम्मानित कर देते हैं। यदि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा दिलाने की बात कही जाती है तो केवल आश्वासन ही मिलता है। शासन प्रशासन की उपेक्षा से उनका मन द्रवित रहता है।
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नसीब नहीं हो सका वारिस प्रमाण पत्र
कहला के शहीद कालिका प्रसाद के पौत्र महेशचंद्र शासन-प्रशासन के रवैये से गुस्से में हैं। बोले, आज तक उनके परिवार के लोगों को वारिस प्रमाण पत्र नहीं मिल सका। बाबा को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा तक नहीं मिल सका। हर बार अफसर व नेता वादा कर चले जाते हैं। न तो पानी की समस्या दूर हुई, सड़क भी बदहाल पड़ी है। समस्याओं को दूर करने का हर बार वादा ही नेता व प्रशासनिक अधिकारी करते हैं।