गजराही सीएचसी में एक अधीक्षक समेत पांच नियमित और चार संविदा के चिकित्सकों की तैनाती हुई है। इसके बावजूद नाम बड़े और दर्शन छोटे का हाल बना हुआ है। दोपहर दो बजे के बाद सीएचसी गेट पर ताला लटकने लगता है। जिससे मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
गजराही सीएचसी में डॉ. आलोक रंजन, डॉ. मनोज प्रजापति, डॉ. चंदन त्रिपाठी, डाॅ. अतुल पटेल और डाॅ. नागेश्वर त्रिपाठी के अलावा संविदा पर डाॅ. शिखा मिश्रा, डॉ.आरसी खातून, डॉ. सरिता सिंह, डाॅ. हरिश्चंद्र चौधरी और फार्मासिस्ट, वार्डबॉय, स्टाफ नर्स के साथ स्वीपर की तैनाती हुई है। लेकिन इस अस्पताल का संचालन सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ही होता है। इससे गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है। इस मामले में सीएचसी अधीक्षक डॉ. आलोक रंजन ने कहा कि दो बजे तक ओपीडी का संचालन हो रहा है। इसलिए दोपहर दो बजे अस्पताल बंद कर दिया जाता है। वहीं, एडी डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद सभी चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ नाम का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। डॉक्टर के आने और जाने का समय तय नहीं है। दोपहर बाद यदि उलटी दस्त शुरू हो जाए तो झोलाछाप डॉक्टर के पास इलाज कराने जाना पड़ता है। दीपक मिश्र, लक्ष्मणपुर।
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30 बेड के सीएचसी में यदि भर्ती होने वाले मरीज आते हैं तो उन्हें तत्काल रेफर कागज थमा दिया जाता है। भर्ती कर इलाज नहीं किया जाता है। दोपहर बाद अस्पताल के मेन गेट पर ताला लटकने लगता है। - सुरेंद्र चौधरी, गजराही।