जिले में 110 साधन सहकारी समितियों में करीब 50 फीसदी में खाद नहीं है। साथ ही 10 फीसदी समितियों में खाद न होने की वजह से ताले लटक रहे हैं। जिन समितियों में रैक पहुंच भी रही है वहां कुछ ही घंटों में खाद खत्म हो जा रही है। रबी सीजन की फसल की बोवाई की तैयारी शुरू होते ही यूरिया और डीएपी की मारामारी शुरू हो गई है। अधिकांश किसानों को समितियों से मायूस होकर ही लौटना पड़ रहा है।
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि समितियों पर यूरिया 17,918 मीट्रिक टन, डीएपी 3,577 मीट्रिक टन, एनपीके 4,011 मीट्रिक टन और एमओपी 1,235 मीट्रिक टन उपलब्ध है। बोवाई से पहले किसान उर्वरकों की खरीदारी के लिए समितियों पर पहुंच रहे हैं लेकिन अधिकांश पर ताले लटक रहे हैं। मजबूरन उन्हें निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। इस वक्त आलू, गेहूं और मटर समेत अन्य फसलों को किसान लगाते हैं। जिसके लिए डीएपी और यूरिया की जरूरत पड़ती है। लेकिन, समितियों से खाद गायब है।
आसपुर देवसरा क्षेत्र के साधन सहकारी समिति अकारीपुर में उर्वरक उपलब्ध न होने के कारण ताला लटकता रहा। कुंडा के बभनपुर समिति में पुराने स्टॉक का वितरण किया जा रहा है। 25 अक्तूबर तक नए स्टॉक आने की बात कही गई। समिति देल्हूपुर में दोपहर दो बजे तक ताला बंद रहा। अकोढ़िया में डीएपी और यूरिया कम होने की जानकारी सचिव राकेश सिंह ने दी। साधन सहकारी समिति सांगीपुर में दोपहर एक बजे तक ताला लटकता रहा। लालगंज के बसुवापुर में उर्वरक उपलब्ध नहीं था। समिति मानधाता के सचिव राकेश सिंह ने बताया कि 600 से अधिक सदस्य है। 200 बोरी डीएपी उपलब्ध हुई है।
किसानों से बातचीत
0 पांच दिन से उर्वरक के लिए सहकारी समिति बैजलपुर का चक्कर लगा रहा हूं। कभी समिति बंद रहती है तो कभी लंबी लाइन की वजह से खाद नहीं मिल रही।
मोहम्मद इलियास, सलेम भदारी।
0 साधन सहकारी समिति रेहुआ लालगंज पर तीन बार खाद लेने गया। समिति बंद होने के कारण खाद नहीं मिल सकी। जिम्मेदार खाद मिलने की जानकारी भी नहीं दे रहे हैं।
रामबहोर पांडेय, रेहुआ लालगंज।
0 साधन सहकारी समिति अकोढ़िया मानधाता में डीएपी और यूरिया नहीं मिल रही है। बाजार से महंगे दाम पर उर्वरक खरीद रहे हैं।
आशीष सिंह, पूरे हिंछा।
समितियों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। जिन समितियों पर ताले लटक रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कम उर्वरक वाली समितियों को नई रैक उपलब्ध कराई जाएगी।
देवेंद्र वर्मन, एआर कोपारेटिव।