मौसम के बदलाव से बुखार पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। जिन लोगों को बुखार है, उन्हें डेंगू संक्रमित होने की शंका डरा रही है। रक्त जांच में प्लेटलेट्स कम होने की रिपोर्ट से लोग परेशान हो रहे हैं। प्लेटलेट्स के लिए लोग लखनऊ और प्रयागराज तक दौड़ रहे हैं। जबकि बिना चिकित्सक की सलाह के बुखार या डेंगू पीड़ित को प्लेटलेट्स नहीं चढ़ाया जाता। परेशानी यह भी है कि जिले के दो बड़े सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स अलग करने की मशीन ही नहीं है।
डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के पैथालॉजी में हर दिन होने वाली जांच में 40 से 60 मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी मिल रही है। उनमें प्लेटलेट्स की कमी मिल रही है। डेंगू के मरीज भी बढ़ रहे हैं। लोग प्लेटलेट्स के लिए परेशान होकर घूम रहे हैं, जबकि अधिकतर संक्रमितों, बीमारों को इसकी जरूरत नहीं होती।
मेडिकल कॉलेज, कुंडा सीएचसी और अजीत नगर स्थित निजी ब्लड बैंक संचालित हो रहा है। मगर मेडिकल कॉलेज और कुंडा में प्लेटलेट्स की व्यवस्था नहीं है। निजी ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स हैं, जिसे बिना जरूरत के लिए लेना चाहते हैं।
ब्लड से प्लेटलेट्स अलग करने के लिए मेडिकल कॉलेज में नहीं है मशीन
डॉ. सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के ब्लड बैंक व कुंडा सीएचसी के ब्लड बैंक में खून से प्लेटलेट्स अलग करने के लिए मशीन उपलब्ध नहीं है। यहां डोनर से खून तो ले लिया जाता है मगर उनके खून से प्लेटलेट्स अलग करने के लिए मशीनें नहीं हैं। यह व्यवस्था महज अजीत नगर में संचालित निजी ब्लड बैंक में ही है।
खून से प्लेटलेट्स अलग करने के लिए अभी तक व्यवस्था नहीं है। इसके लिए आधुनिक मशीन खरीदने की तैयारी की जा रही है। वैसे हर बुखार या डेंगू पीड़ित को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। लोग घबराएं नहीं, संयम का परिचय दें।
डॉक्टर सुरेश सिंह, सीएमएस राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय