लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर सोमवार को हुए हादसे में 12 लोगों की मौत ही नहीं हुई कई परिवार बिखर गए। कई लोगों के सपने टूटे तो कई रिश्ते दर्द देने वाले हो गए। 12 लोगों की मौत के बाद हर तरफ रोते-बिलखते लोग वहां संवेदना देने आए अपनों को रुलाते रहे।
जेठवारा के भैरोपुर नौबस्ता नारायनपुर निवासी सतीश टेंपो चलाकर अपने परिवार का गुजर बसर करता था। उसके पिता राधेश्याम बसपा कार्यकर्ता थे। मां अंजू उर्फ विमला की तबीयत ठीक नहीं रहती थी।
सोमवार को मां का इलाज कराने के लिए वह पिता राधेश्याम को साथ लेकर आया था। डॉक्टर को दिखाने के बाद वह उन्हें लेकर घर जा रहा था। टेंपो में जेठवारा रूट की सवारियां भी बैठाईं थी। टेंपो में कुल 16 लोग सवार थे।
हादसे में सतीश व उसके माता पिता की मौत हो गई। उसकी पत्नी नेहा ने नौ माह की बेटी के लिए जो सपना देखा था वह बिखर गया।
दूसरी ओर सुल्तानपुर के नेवादा इशहाकपुर की रहने वाली शहनाज मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के रूप में तैनात थी। वह अपनी बहन आशा असद को साथ लेकर इलाज कराने जेठवारा जा रही थी, लेकिन दोनों बहनों की मौत हो गई।
जेठवारा के धनसारी निवासी नीरज पांडेय बीए का छात्र था। ग्रामीणों के अनुसार सेना भर्ती में उसका चयन भी हो गया है, लेकिन इसके पहले ही उस पर मौत झपट पड़ी। सोमवार को वह सुल्तानपुर के रहने वाले अपने भांजे अभिनव व भांजी गौरी के साथ टेंपो से घर जा रहा था।
इस हादसे में मामा भांजी की मौत हो गई। जबकि भांजे की हालत गंभीर बनी हुई है। जेठवारा के ही धनराई निवासी शीतला प्रसाद ईंट भट्ठे पर मुंशी था। तीन बेटी की शादी कर चुका था। छोटी बेटी रुद्रा एएनएम की पढ़ाई कर रही है। वह उसे लोगों का इलाज करने का सपना देख रखा था लेकिन हादसे ने उसे बेटी से दूर कर दिया।