फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pratapgarh News: सुविधाएं भरपूर, काम धेला भर नहीं, मंदाह सीएचसी में आठ महीने बीते, नहीं गूंजी किलकारी

Fri, 25 Aug 2023 09:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
रानीगंज में 282 तो कुंडा में 1624 प्रसव पीड़िताओं को भर्ती कर चिकित्सकों ने कराया प्रसव
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। शिशु एवं मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से सरकार की ओर से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर जोर है। पीएचसी व सीएचसी पर संस्थागत प्रसव कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अधिकारियों की लापरवाही की वजह से मंदाह सीएचसी में बीते आठ महीने के भीतर एक भी प्रसव नहीं कराया जा सका है। वहीं कहला में 33 तो रानीगंज में 282 प्रसव ही कराए गए। ऐसे में क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में जाकर प्रसव कराना मजबूरी बनी है।
वर्ष 2002 में 30 बेड के मंदाह सीएचसी अस्तित्व में आया। लोगों की उम्मीद थी कि स्वास्थ्य केंद्र के खुल जाने से क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी। अब यह सीएचसी निरर्थक साबित हो रहा है। अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन संस्थागत प्रसव नहीं कराए रहे हैं। सीएचसी शुरू होने से अभी तक इस सीएचसी में किलकारी नहीं गूंजी है। इस लापरवाही से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीएचसी मंदाह का संचालन कैसे किया जा रहा है। ग्रामीण परेशान होकर घूम रहे हैं।
विज्ञापन

रेफरल सेंटर रानीगंज की बात की जाए तो जनवरी से लेकर अभी तक महज 282 संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। वहीं कहला सीएचसी में 33 तो संडवाचंद्रिका सीएचसी में 210 और सुखपाल नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 342 तथा कुंडा सीएचसी में 1624 संस्थागत प्रसव कराए गए। संस्थागत प्रसव कराने में लापरवाही बरत रहे एमओआईसी पर स्वास्थ्य विभाग के मुखिया की नजर ही नहीं पड़ रही है।


डॉक्टर और वार्ड बाॅय के भरोसे मंदाह सीएचसी
मंदाह सीएचसी में डॉक्टर पंकज मिश्र के अलावा एक वार्ड बॉय की तैनाती की गई है। स्टाफ नर्स और वार्ड बाॅय के साथ फार्मासिस्ट व एलटी को हटा दिया गया। इस वजह से प्रसव कराने में दिक्कत होने की बात कही जा रही है।
-
डॉक्टर आते नहीं, जिम्मेदारी से बचने के लिए स्टाफ नर्स कर देती हैं रेफर
रानीगंज सीएचसी में महिला डॉक्टर की तैनाती तो हुई है। आरोप है कि वह दोपहर दो बजे के बाद घर चली जाती हैं। स्टाफ नर्स अकेले रहती हैं। डॉक्टर उपस्थित हों या नहीं, स्टाफ नर्स गर्भवती महिलाओं को मेडिकल कॉलेज रेफर कर देती हैं। ऐसे में परेशान परिजन प्रसव पीड़िताओं को लेकर पास स्थित निजी अस्पताल लेकर चले जाते हैं।
विज्ञापन

-
सभी एमओआईसी को संस्थागत प्रसव बढ़ाने का आदेश दिया गया है। यदि प्रसव पीड़िताओं को रेफर किया जा रहा है तो अब एमओआईसी को वजह बतानी होगी। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें