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Pratapgarh News: जनसुनवाई के दिन भी ईओ की कुर्सी खाली, कौन सुने समस्या

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प्रदेश सरकार ने भले ही जनता की सहूलियत के लिए तहसील, थाना, ब्लॉक के बाद नगर निकायों में जनसुनवाई का दिन निर्धारित करते हुए पीड़ितों की समस्या सुनकर निस्तारण का आदेश दिया है, लेकिन कुछ अफसरों पुराने ढर्रे पर ही काम कर रहे हैं। नगर पालिका को छोड़कर नगर पंचायतों में नागरिकों की समस्या सुनकर निराकरण में अफसर मनमानी कर रहे हैं। सोमवार को नगर पंचायत कार्यालयों में सरकार के जनसुनवाई के दावों की हकीकत खंगाली गई सरकारी दावे की कलई खुल गई।
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कटरामेदनीगंज नगर पंचायत में खाली रहीं कुर्सियां
नगर पंचायत कटरामेदनीगंज कार्यालय में ईओ व लिपिक के कार्यालय में सन्नाटा था। ईओ व लिपिक की कुर्सी खाली थी। सेवा प्रदाता कर्मचारी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बाहर खड़े थे, लेकिन ईओ व लिपिक के न आने के सवाल पर जवाब देने के बजाय आगे बढ़ गए। मोहल्ले के गुड्डू, जितेंद्र कुमार ने बताया कि जनसुनवाई के दिन अफसर के न बैठने की वजह से नागरिकों ने समस्या लेकर जाना बंद कर दिया है। प्रभारी ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि वह नगर पालिका में समस्या सुन रहे थे। लिपिक क्यों नहीं पहुंचा था। उससे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।


रामगंज नगर पंचायत में ईओ कार्यालय में सन्नाटा
नवसृजित नगर पंचायत रामगंज कार्यालय में जनसुनवाई के समय ईओ की कुर्सी खाली रही। उनकी गैरमौजूदगी में समस्या लेकर आने वाले लोग भी कम ही आए। कार्यालय में मौजूद कर्मचारी कुछ लोगों के शिकायती पत्र लेकर रजिस्टर में अंकित जरूर करता रहा। पूछने पर बोला कि जो जानकारी लेनी है मैडम से करें।
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कुंडा नगर पंचायत में भी नहीं मिले ईओ
नगर पंचायत कुंडा में भी जनसुनवाई के दौरान ईओ मौजूद नहीं रहे। उनकी कुर्सी खाली ही थी। कर्मचारियों ने बताया कि कुछ देर में ईओ साहब आ भी सकते हैं नहीं तो हीरागंज नगर पंचायत चले गए होंगे। जलनिकासी की समस्या का निराकरण कराने के लिए पहुंचे कस्बे के अजय कुमार व मोहन बिना प्रार्थना पत्र दिए लौट गए। लोगों का कहना था कि कर्मचारियों को शिकायती पत्र देने का कोई मतलब नहीं होता।



समस्याओं का अंबार, रानीगंज में नहीं बैठे ईओ
नगर पंचायत रानीगंज के सभी मोहल्लों में समस्याओं का अंबार है। जनसुनवाई के दिन ईओ महेंद्र सिंह कार्यालय नहीं आए। जबकि रस्तीपुर मोहल्ले में सड़क पर जलभराव की समस्या बनी हुई है। स्कूली बच्चों व राहगीरों की समस्या के निराकरण के लिए भी रंजय, बच्चा समेत अन्य लोग कार्यालय पहुंचे, लेकिन सभी को लौटना पड़ा। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों की नागरिकों की समस्याओं को सुनने में दिलचस्पी नहीं थी।

कई नगर पंचायतों का गठन इसी चुनाव से ठीक पहले का है। इसलिए अधिशासी अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक का अभाव है। एक-एक ईओ के पास चार से पांच नगर पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार है। ऐसे में हर जगह पहुंचना संभव नहीं हो पाता है। हमने शासन से ईओ और कर्मचारियों की तैनाती की मांग की है। जबतक ईओ पूरे नहीं हो जाते, तब तक नगर पंचायत में मौजूद कर्मचारी प्रार्थनापत्र ले लेते हैं और जब ईओ आते हैं तो निस्तारण करते हैं। - संजीव रंजन, जिलाधिकारी।
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