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Pratapgarh News: भारी-भरकम फीस वसूलने के बाद भी शिक्षक पूरा नहीं करा पाते कोर्स, बच्चों को कोचिंग भेजना मजबूरी

Sat, 20 Jan 2024 03:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
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दिलीप कुमार मिश्रा
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16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों के कोचिंग पढ़ाने पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है, लेकिन छात्र इसे जरूरी बता रहे हैं तो अभिभावक मजबूरी। संचालकों ने दावा किया स्कूल की सुविधा बेहतर होती तो उनके यहां फीस देकर दो घंटे पढ़ने के लिए छात्र मजबूर नहीं होते। परिणाम भी दिख रहा है कि हर किसी ने किसी कोचिंग से जुड़े विद्यार्थी ही टॉपर की सूची में शामिल होते हैं।
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16 साल या 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के कोचिंग पढ़ने पर सरकार ने रोक लगाई है। इतना ही नहीं कोचिंग में छात्रों के पढ़ते मिलने पर एक लाख तक के जुर्माने तक का निर्देश है। सरकार के इस फैसले का सीधा प्रभाव कोचिंग संचालकों पर पड़ेगा। इतना ही नहीं छात्र इस निर्देश को सहज नहीं मान रहे हैं।
कौशाम्बी की बात करें तो यहां करीब 20 से अधिक कोचिंग संस्थान हैं। इन संस्थानों में हाईस्कूल व इंटर तक के विद्यार्थियों को कोचिंग में पढ़ाया जा रहा है। इनमें से कई संचालक आठवीं तक की कोचिंग का पंजीकरण कराए हैं। बाकी बिना पंजीकरण के संचालित हैं। जिले के सात कोचिंग संस्थान ऐसे हैं जिनका पूर्व में रजिस्ट्रेशन था, लेकिन संस्थानों ने तीन साल पूरे होने के बाद दोबारा नवीनीकरण नहीं कराया।
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- स्कूल में विषय ज्यादा बेहतर तरीके से समझ में नहीं आ पाता। विषय को लेकर ज्यादा सक्रियता नहीं दिखने के कारण उनकी मजबूरी है कि कोचिंग पढ़ा जाए। - मानस त्रिपाठी, नौंवी के छात्र
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स्कूल में किसी न किसी विषय के शिक्षक के साथ परेशानी बनी रहती है, जबकि कोचिंग में ऐसा नहीं है। समय से विषय व उससे जुड़े डाउट क्लीयर होते हैं। इस कारण कोचिंग जरूरी है।- निशांत, नौंवी के छात्र
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स्कूल में हर विषय को लेकर शिक्षक विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से कोर्स पूरा कराते हैं। कोचिंग में दो घंटे में वह सब नहीं हो सकता। कोचिंग वाले केवल श्रेय लेने का काम करते हैं। - यतिंद्र सिंह, प्रधानाचार्य हनुमान इंटर कॉलेज अजुहा

हमारा प्रयास रहता है कि सब विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से पढ़ाई व शिक्षक योग्य हो। विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से पढ़ाया व प्रशिक्षण दिया जाता है। छात्र की नींव यहां मजबूत होती है। ऐसा न होता तो स्कूल में छात्र नहींं आते। - विद्याशंकर शुक्ला, प्रधानाचार्य कौशाम्बी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोठी कनैली
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बेटा कक्षा 10 में पढ़ता है, स्कूल के साथ पढ़ाई के लिए कोचिंग भी जाता है। कोचिंग इस उद्देश्य से पढ़ा रहा था कि किसी विषय को यदि स्कूल में पढ़ाया गया है तो दोबारा उसी को कोचिंग में पढ़े। इससे उससे विषय अच्छे से समझा में आएगा और बोर्ड में अच्छे नंबर मिलेंगे। - दिलीप कुमार मिश्रा, अभिभावक

मेरे तीन बच्चे हैं। स्कूल में उनको पढ़ाने के नाम पर कोरम पूरा होता है। भारी-भरकम फीस वसूल निजी स्कूल करते हैं। बदले में इतना ज्यादा कोर्स दे देते हैं कि मजबूरी में कोचिंग में पढ़ाना पड़ता है। - नितिन श्रीवास्तव, अभिभावक

स्कूलों से बेहतर शिक्षा मिलती तो हमारे संस्थान में विद्यार्थी नहीं आते, जो काम पूरे दिन विद्यालय नहीं करते। वह हम दो घंटे की क्लास में कर रहे हैं। यही कारण है कि हमारे संस्थान में भीड़ लगी रहती है। - राम चंद्र गौतम, कोचिंग संचालक

पहले सरकार को स्कूलों की हालत बेहतर करना चाहिए। यदि स्कूल अच्छी शिक्षा देने लगे तो कोचिंग खुद ही बंद हो जाएंगी। टॉपर हमारे संस्थान से निकल रहे हैँ इसका मतलब हम बेहतर हैं। - गोपम गुप्ता, कोचिंग संचालक
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जिले में केवल आठ कोचिंग पंजीकृत हैं। इसके अलावा अन्य कोई कोचिंग चल रही है तो इनके खिलाफ सोमवार से अभियान चलेगा। सरकार की मंशा के अनुरूप ही काम होगा।- डॉ. एसएन यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक

दिलीप कुमार मिश्रा

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