उमस भरी गर्मी में जिले की बिजली खपत डेढ़ गुना से अधिक बढ़ गई है। नवंबर-दिसबंर में जिले में औसतन 85 मिलियन यूनिट खपत होती थी जो जुलाई में 145 मिलियन यूनिट तक हो गई है। लो वोल्टेज के साथ ही 20 फीसदी लाइनलॉस हो रहा है।
जुलाई में तापमान बढ़ते ही बिजली खपत भी तेजी से बढ़ी है। बिजली खपत बढ़ने से शहर से लेकर गांव तक आपूर्ति बाधित हो रही है। ओवरलोड के साथ ही लो वोल्टेज की समस्या से उपभोक्ताओं को जूझना पड़ रहा है। जिले में सोनभद्र व शक्तिनगर से बिजली ली जाती है। रेनकूट, ओबरा और अनपरा विद्युत केंद्र से बिजली ट्रांसफर होकर जिले में पहुंचती है। दूरी के चलते कुल बिजली का 20 फीसदी लाइनलॉस हो जाता है। इस कारण महज 80 फीसदी बिजली ही जिले को मिलती है।
मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने के कारण विभाग को बिजली कटौती करनी पड़ रही है। जून से जुलाई तक जिले में बिजली की खपत डेढ़ गुना से अधिक बढ़कर 146 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है जो नवबंर-दिसबंर में 80 से 85 मिलियन यूनिट थी।
शहर में ओवरलोड-फाल्ट से हो रही कटौती
शहरी क्षेत्र में कई बार आपूर्ति बाधित हो रही है। ओवरलोड के चलते लाइनों में फाल्ट बढ़ गया है। जजेज आवास के पास रविवार दोपहर बिजली का तार शॉर्ट सर्किट के कारण टूटकर गिरा गया। जिससे दहिलामऊ और जजेज आवास में आपूर्ति बाधित हो गई। इसी तरह मीराभवन, पूरे ईश्वरनाथ, अंबेडकर चौराहा समेत अन्य जगहों पर बिजली की आवाजाही हो रही है।
जिले में ऐसे बढ़ी बिजली की खपत
वर्ष- नवंबर-दिसंबर- मई- जून- जुलाई
2023-75-80 -95-125-135
2024-80-85-105-135-145
(बिजली खपत के आंकड़े मिलियन यूनिट में)
जुलाई में 146 मिलियन यूनिट खपत है। जबकि नवंबर-दिसबंर में 80 से 85 मिलियन यूनिट खपत थी। दूर से बिजली आने के कारण 20 फीसदी लाइनलॉस हो रहा है। साथ ही लो वोल्टेज की भी समस्या है।
सत्यपाल, अधीक्षण अभियंता, बिजली विभाग