मेडिकल कॉलेज तो बन गया लेकिन डॉक्टरों की कमी मरीजों पर बहुत भारी पड़ रही है। पीडियाट्रिक सर्जन न होने की वजह से बच्चों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे है। उन्हें प्रयागराज रेफर किया जाता है।
जिले की करीब 37 लाख की आबादी के उपचार के लिए 29 सीएचसी, 56 पीएचसी के अलावा मेडिकल कॉलेज का संचालन हो रहा है। शायद ही कोई ऐसा सेंटर हो, जहां स्टाफ पूरा हो।
जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर डॉ. सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज बने तीन साल हो गए। यहां एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट, एक असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ एक पीडियाट्रिक सर्जन और एक सीनियर रेजीडेंट (एसआर) का पद सृजित है। लेकिन सिर्फ असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार की ही तैनाती हुई है। वह बाल रोग विशेषज्ञ हैं।पढ़ाने के साथ मरीजों को भी देखते हैं।
पीडियाट्रिक सर्जन की तैनाती न होने के कारण जिन बच्चों को हॉर्निया, हाइड्रोसील, पथरी, आंत का ऑपरेशन होना होता है, उन्हें चिकित्सक प्रयागराज रेफर कर देते हैं। डॉ. अनिल कुमार बताते हैं कि उनके पास प्रत्येक माह ऑपरेशन वाले केस औसतन 15 के करीब आते हैं। मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक सर्जन की तैनाती न होने के कारण रेफर किया जाता होगा।
दो साल पहले पीडियाट्रिक सर्जन की हुई थी तैनाती
दो साल पहले पीडियाट्रिक सर्जन की तैनाती मेडिकल कॉलेज में हुई थी। कुछ ही दिनों बाद वह नौकरी छोड़कर चले गए। इससे मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ रहा है।
क्या बोले मरीज
बेटे को पथरी गई। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर को दिखाया। चिकित्सकों ने यह कहकर प्रयागराज रेफर कर दिया कि मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक सर्जन की तैनाती नहीं हुई है।
नंद कुमार, सैफाबाद पट़्टी
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाए जाने से मरीजों को किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा है। मैं अपनी बेटी का इलाज कराने गया तो पता चला कि पीडियाट्रिक सर्जन ही यहां पर तैनात नहीं हैं।
राहुल मिश्र, जहनईपुर
रिक्त पद पर चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। मैं जब से अपनी सेवा दे रहा हूं। तब से एक भी पीडियाट्रिक सर्जन की तैनाती नहीं हुई है। प्रयास रहेगा कि नए साल में रिक्त पदों पर चिकित्सकों की तैनाती हो जाए।
डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य
नन्द कुमार।