प्रतापगढ़। महिलाओं के साथ बढ़ती अपराधिक वारदातों को देखते हुए कामकाजी महिलाआें की सुरक्षा को लेकर शासन चिंतित हो उठा है। ऐसी महिलाओं की सुरक्षा के लिए वर्ष 2001 में ही शासनादेश जारी हुआ था लेकिन अफसराें की उदासीनता के कारण ऐसे मामले सामने आने के बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही थी। अब नए सिरे से शासन का आदेश आने के बाद इस पर नजर रखने लिए जिला स्तर पर महिलाओं की टीम गठित की गई है।
घर, बाहर के साथ ही सरकारी, अर्धसरकारी और निजी प्रतिष्ठानाें में महिला कर्मियाें के यौन उत्पीड़न के मामले सामने आते हैं। अपराधों का ग्राफ बढ़ने के साथ ही इस तरह के मामलों में भी बढ़ोतरी आ गई है। तीन साल पहले बेल्हा में सिंचाई विभाग के कार्यालय में कर्मचारियों ने महिला सहकर्मी का उत्पीड़न किया। उसमें एफआईआर भी कराई गई थी लेकिन आरोपी कर्मी बच गए। एक शिक्षिका ने भी अपने प्रधानाचार्य पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया लेकिन मामला पंचायत कर दबा दिया गया।
नगर कोतवाली की एक महिला सिपाही ने तो कोतवाल पर ही आरोप लगाया, लेकिन अफसराें ने जांच में मामला दबा दिया। प्राइवेट संस्थानाें में भी कई बार इस तरह के मामले सामने आए, लेकिन जांच के नाम पर कार्रवाई दबा दी गई। हाल में ही शासन ने कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा करने के बाद इस बाबत जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को आदेश भेजा है। पुरानी टीम की सक्रियता की जानकारी अधिकारी जुटा रहे हैं। यदि टीम के लोग सही काम कर रहे होंगे तो उन्हें फिर से मौका मिल सकता है। अन्यथा नई टीम गठित की जाएगी।