बिना हेलमेट के युवक ही नहीं युवतियां भी स्कूटी व बाइक से फर्राटा भर रही हैं। वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस उनसे बराबर दूरी बनाए रखती है। महिला पुलिस के साथ न होने से पुलिसकर्मी भी युवतियों को रोकना मुनासिब नहीं समझते।
शहर हो या ग्रामीण अंचल हर जगह युवतियां बाइक, स्कूटी व कार चलाते हुए मिल जाएंगी। वे भी अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से लापरवाह हैं। हादसों के दौरान उनकी लापरवाही से जान पर संकट बन आता है। अक्सर देखने को मिलता है कि स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राएं भी स्कूटी लेकर निकलती हैं। अपने साथ लोगों को बैठाकर फर्राटा भरती हैं, लेकिन वे हेलमेट नहीं लगातीं। परिवार के लोग भी शायद उन लोगों को ऐसा करने से नहीं रोकते।
पुलिस व यातायात विभाग के लोग भी युवतियों व छात्राओं को रोकना मुनासिब नहीं समझते और न ही उन लोगों को सलाह देना ही उचित समझते हैं। चूंकि अधिकारियों का निर्देश है कि वाहन चेकिंग के दौरान महिलाओं व बुजुर्गों को न रोका जाए। लेकिन वाहन चेकिंग के दौरान छात्राओं व युवतियों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए भी सचेत नहीं किया जाता। इससे वे बेखौफ होकर सड़कों पर स्कूटी व बाइकों से फर्राटा भरती रहती हैं।
यातायात नियमों का पालन वाहन चलाने वाले सभी लोगों को करना चाहिए। अधिकारियों के आदेश के चलते चेकिंग के दौरान युवतियों को नहीं रोका जाता। उन लोगों को कॉलेजों में जाकर यातायात के नियमों की बराबर जानकारी दी जाती है।
संतोष कुमार यादव, प्रभारी यातायात