गड़बड़ी के आरोपों से घिरे चिलबिला बिजली स्टोर के कीपर आनंद मिश्रा पर आखिरकार गाज गिर ही गई। एससी स्टोर वाराणसी के निर्देश पर सोमवार को उनको प्रतापगढ़ स्टोर से हटाकर इलाहाबाद भेज दिया गया है। उनकी जगह नैनी के स्टोर कीपर संजय वर्मा को यहां का चार्ज लेने के लिए भेजा गया है। चार्ज देने की प्रक्रिया दिनभर पर चलती रही। यह कार्रवाई अमर उजाला की खबर पर हुई है।
चिलबिला स्टोर में ट्रांसफार्मर बेचने और उनकी ढुलाई का गोरखधंधा जोर-शोर से चल रहा है। इसकी आड़ में उपभोक्ताओं से धनउगाही का खेल चल रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि लेनदेन में स्टोर के नीचे से लेकर ऊपर तक के लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। उपभोक्ताओं की इस समस्या को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद डीएम डॉ.आदर्श सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच एसडीएम और एक्सईएन प्रथम को सौंपी। तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने यह रिपोर्ट शासन को भेजी थी। विभाग के सूत्रों की मानें तो उपभोक्ताओं ने जो आरोप लगाये थे वे आरोप जांच रिपोर्ट में सही पाये जाने पर एससी स्टोर वाराणसी ने सबसे पहले चिलबिला स्टोर के कीपर आनंद मिश्रा को यहां से हटाकर इलाहाबाद भेज दिया।
सोमवार को उनकी जगह नैनी से संजय वर्मा को स्टोर का चार्ज लेने चिलबिला भेजा गया। उपभोक्ताओं का आरोप है कि आनंद मिश्रा ही इस पूरे प्रकरण की महत्वपूर्ण कड़ी है। सूत्रों पर विश्वास करें तो स्टोर में और भी गड़बड़ियों की जांच की जानी है। जो आनंद के रहते संभव न हो पाती। गोरखपुर की टीम इस जांच को कर रही है। जांच में अगर आनंद के खिलाफ कोई बड़ा मामला सामने आया तो सख्त कार्रवाई के संकेत मिले हैं। वह यहां से हटना नहीं चाहता है इसलिये अपने प्रभाव का भरपूर इस्तेमाल किया। मगर जब डीएम की रिपोर्ट शासन और विभाग के बड़े अफसरों के पास पहुंची तो अपने को फंसता देखकर चहेतों ने मदद से हाथ खींच लिये है।
एसडीओ पर भी गिर सकती है गाज
स्टोर में हो रही गड़बड़ी पर पर्दा डालने के आरोप में एसडीओ स्टोर एसके मिश्रा पर भी गाज गिर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इतने समय से स्टोर में गड़बड़ी चल रही थी। इसको उजागिर नहीं किया गया। इसमें एसडीओ स्टोर की भी गलती है। हालांकि एसडीओ ने आनंद मिश्रा की कारगुजारियों का काला चिट्ठा स्टोर के एक्सईएन व अन्य अधिकारियों के सामने कई बार लिखित रूप से रखा। मगर किसी ने भी कार्रवाई नहीं की। गोरखपुर की टीम स्टोर की जांच कर रही है। पता चला है कि टीम के हाथ कई महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं जो भारी अभिलेखों में भारी हेरफेर की ओर इशारा कर रहे हैं। पता चला है कि एसडीओ एसके मिश्रा ने अपने बचाव में कई पत्र जांच को सौंपे हैं। उस पत्र में स्टोर में चल रहे गोरखधंधे का खुलासा किया गया है।