आतंकियों को फंडिंग करने के आरोप में पकड़े गए संजय सरोज ने ईंट भट्ठा मजदूर को सरकारी योजना के तहत एक हजार रुपये महीने मिलने का लालच देकर खाता खुलवाने के लिए राजी किया था। इस काम में मजदूर के पड़ोसी युवक ने भी उसे समझाया था जो अब घर छोडक़र फरार है। परिवार के लोगों को नहीं मालूम है कि किस बैंक में खाता खुला था। आशंका जताई जा रही है कि उसने और कई लोगों के नाम से इसी तरह खाते खुलवा रखे थे। उसके पास से अलग-अलग बैंकों की 25 पासबुक मिली हैं। ये पासबुक किसके नाम की हैं, इसका खुलासा अभी नहीं हो सका है। उसके घर से बरामद सारे सामान एटीएस अपने साथ ले गई।
नगर कोतवाली के राजापुर औवार निवासी ओमप्रकाश वनवासी ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है। उसके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने उसे बैंक खाता खोलने के लिए लालच दिया। संजय सरोज से बात कराकर बताया कि उसके खाते में सरकारी योजना से हर माह एक हजार रुपये आएंगे। इस लालच में ओमप्रकाश ने उसे अपना पहचान पत्र दे दिया। दो तीन दिनों बाद युवक ने चंपतपुर के सुधाकर तिवारी को गारंटर बनने के लिए बैंक बुला लिया। वह खुद भी ओमप्रकाश का गारंटर बनने की बात कर रहा था। बैंक मेें खाता खुलने के बाद ओमप्रकाश ने पड़ोसी युवक से कई बार अपना पहचान पत्र मांगा, लेकिन वह टालमटोल करता रहा। बाद में पता चला कि नीरज मिश्रा व संजय सरोज के पास उसके अभिलेख रखे हैं, लेकिन उसके हाथ पहचान पत्र व पासबुक नहीं आई। टेरर फंडिंग के लिए संजय सरोज इसी खाते में रुपये मंगवाता था। सूत्रों के मुताबिक संजय के पास से बरामद 25 बैंकों की पासबुक अलग-अलग बैंकों की हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि उसने दूसरे लोगों के नाम से और भी खाते खोलवा रखे थे।
सुधाकर से परिजनों की कराई बात
नगर कोतवाली के चंपतपुर निवासी सुधाकर तिवारी के पिता के मोबाइल पर शनिवार व रविवार को एटीएस कार्यालय लखनऊ से फोन आया। सुधाकर से परिजनों की बात भी कराई गई। बताया कि अभी पूछताछ चल रही है। जानकारी करने के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा। ओमप्रकाश के परिजनों के पास कोई फोन नहीं आया। जिससे परिवार के लोग चिंतित हैं।
पासपोर्ट की जांच में ही व्यस्त है एलआईयू
शहर से सात किमी दूर आतंकियों को फंडिंग के जरिए मदद पहुंचाने के आरोपी संजय सरोज ने अपना जाल बिछा रखा था। वह घर बैठकर आतंकियों की मदद करता था, लेकिन जिले की खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। एलआईयू को पासपोर्ट जांच करने की जंग लग गई है। उसके सारे कर्मचारी और अधिकारी इसी में व्यस्त रहते हैं।
आतंकियों को फंडिंग करने का आरोपी संजय सरोज नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज में छह साल से रहता था। उसे क्राइम ब्रांच की टीम जेल भेज चुकी है। एटीएम से रकम उड़ाने के मामले में वह जेल भी जा चुका है, लेकिन पुलिस के पास उसके खिलाफ कोई साक्ष्य मिल नहीं रहे हैं। खास बात यह है कि जिले में ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एलआईयू, और आईबी की टीम काम कर रही है। एलआईयू में प्रभारी को लेकर आठ पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, लेकिन इन लोगों को कभी कुछ पता नहीं चलता। कोई बड़ी घटना होने के बाद भी यह खुफियातंत्र निष्क्रिय पड़े रहते हैं।
और तो और एटीएस की कार्रवाई तक की भनक भी नहीं लग सकी। इसी तरह रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले के आरोपी को शरण देने के मामले में आरोपी कुंडा के सरयूनगर निवासी कौशर फारूकी के बारे में भी एलआईयू को कुछ नहीं पता था। कुछ माह पूर्व लालगंज कोतवाली क्षेत्र से आतंकियों से हुई बातचीत के बाद पूछताछ के लिए उठाए गए युवक की भी कोई सूचना नहीं थी। कुछ दिनों पहले मानधाता में एक पाक नागरिक की मौत हो गई थी। वह कब से जिले में रह रहा था, इस बात की एलआईयू को जानकारी नहीं थी। केवल राजनैतिक दलों के कार्यक्रमों व धरना प्रदर्शन तक टीम सिमटी रहती है। एलआईयू के पास पासपोर्ट की जांच का जिम्मा रहता है। जिसके कारण दरोगा से लेकर सिपाही तक उसी में उलझे रहते हैं। इससे उनका असली काम प्रभावित होता है। प्रभारी निरीक्षक एलआईयू कहते हैं कि वे लोग अपना काम करते हैं। यदि उन्हें संजय सरोज की करतूत की भनक लगी होती तो वह अपने अधिकारियों को बताकर यहां की टीम से कार्रवाई कराते। एटीएस के पास बहुत से संसाधन हैं। वे लोग कार्रवाई की जानकारी तक नहीं देते।
संजय के घर से अलग-अलग बैंकों की 25 पासबुक, 92 एटीएम कार्ड मिले
आतंकियों को फंडिंग करने के मामले में पकड़े गए संजय सरोज के घर से एटीएस ने अलग-अलग बैंकों की 25 पासबुक, 91 एटीएम कार्ड, 7 स्वैप मशीन, मैगनेटिक रीडर, लैपटॉप के साथ पिस्टल और दस लाख रुपये भी बरामद किए थे। आलमारी व तिजोरी में उसने रुपये रख रखे थे। पकड़े जाने के बाद उसने एटीएस को भी गुमराह करने का प्रयास किया था।
नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज में पंजाब से आकर छह साल पहले बसे संजय सरोज पुत्र रामखेलावन सरोज के घर शनिवार की शाम एटीएस की टीम पहुंची थी। उस समय संजय सरोज घर पर ही था। टीम उसे हिरासत में लेने के बाद आवास की तलाशी लेने लगी। संजय ने मकान में ही अपना कार्यालय बना रखा था। पुलिस सूत्रों की मानें तो संजय ने पहले गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन उसकी बातों को नजरदांज करते हुए टीम तलाशी लेने लगी। इस दौरान घर से 92 एटीएम, अलग-अलग बैंकों की 25 पासबुक, 7 स्वैप मशीन, एक लैपटॉप, पिस्टल व कारतूस, एक मैगनेटिक रीडर और करीब 10 लाख रुपये नगद बरामद हुए। पूछताछ करने के बाद टीम ने उसके साथी नीरज को बुलाकर दबोच लिया।
कुछ देर में सुधाकर तिवारी भी टीम के चंगुल में फंस गया। बाद में ओमप्रकाश वनवासी को टीम उसके घर से उठा लाई। ओमप्रकाश के साथ उसका पिता भी रामलखन भी बाजार तक आया था। पूछताछ के बाद सभी को लेकर टीम लखनऊ चली गई। भगेसरा गांव के ही संजय नाम के एक और युवक को एटीएस ने उठाया था, लेकिन लेकिन पूछताछ करने के बाद उसे छोड़ दिया गया। हालांकि वह अभी घर नहीं पहुंचा है। पृथ्वीगंज चौकी पुलिस भी उसके बारे में कोई सही जानकारी नहीं दे पा रही है।
घर में लटक रहा ताला, परिवारीजनों का नहीं है पता
नगर कोतवाली के पृथ्वीगंज भगेसरा बाजार में संजय सरोज के घर पर शनिवार दोपहर तक खासी चहल पहल रहती थी। रविवार को उसके घर पर सन्नाटा पसरा रहा। घर में ताला बंद था। परिवारीजनों का भी कहीं अता पता नहीं था। दूरदराज से आने वाले लोग संजय के मकान को निहारते रहे। बाजार के कुछ लोग उसके ननिहाल में रहने की बात कह रहे थे, लेकिन कुछ लोग इससे इनकार करते रहे। संजय के खिलाफ कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था।
दिल खोलकर उड़ाता था रुपये
नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज बाजार में छह साल पहले पंजाब से आकर बसे संजय सरोज शुरू से ही बाजार के लोगों की मदद के लिए खड़ा रहता था। वह अपने कारनामों को छिपाने के लिए बाजार के जरूरतमंदों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता था। धार्मिक स्थलों को चंदा देने में भी वह पीछे नही रहता था। किसी भी काम के लिए वह दिल खोलकर रुपये उड़ाता था। यहां तक कि जरूरत पडने पर बाजार और आसपास के लोगों को अपनी गाडिय़ां भी इस्तेमाल करने के लिए दे देता था।