लोक निर्माण विभाग के कार्यालय में अलग ही राज चलता है। यहां न प्रशासन की हनक दिखाई देती है और न ही पुलिस का खौफ। सत्ता पक्ष के कुछ सफेदपोशों के साथ ही बदमाशों की तूती बोलती है। वे जिसे चाहते हैं, उसे ही सड़कों के निर्माण के लिए टेंडर मिलता है। यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी कई बार टेंडर डालने के दौरान या फिर पहले परिसर में न सिर्फ असलहे लहराए गए हैं, बल्कि अफसरों व कर्मचारियों को भयभीत करने के लिए हवा में गोलियां भी चलाई गई हैं। बुधवार को हुई घटना के बाद जिलाधिकारी ने सड़कों के टेंडर का ब्यौरा तलब किया है।
शासन प्रशासन लोनिवि के कार्यो को लेकर हमेशा पारदर्शिता बरतने का दावा करता है। प्रशासन का दावा लोक निर्माण विभाग से निकलने वाले कार्यो के टेंडर के दौरान दम तोड़ता नजर आता है। माफियाओं के कब्जे में लोनिवि कार्यालय रहता है। लोगों की मानें तो हर सड़कों के टेंडर पर उनका दखल होता है। उनके ऊपर सत्ता पक्ष के नेताओं का हाथ जो रहता है। इसलिए न तो अधिकारी विरोध का साहस करते हैं और न ही कर्मचारी। असलहों का प्रदर्शन करने वालों की ताकत का सभी को एहसास रहता है। इसलिए उनके इशारे पर सड़कों के निर्माण का टेंडर ठेकेदार लेता है। जिससे कमीशन की सौदेबाजी हो जाती है। यदि बीच कोई दूसरा ठेकेदार रोड़ा पैदा करता है तो उसे समझने की जिम्मेदारी ऐसे माफिया लेते हैं। बुधवार को पचासों राउंड फायरिंग हुई तो अधिकारियों की नींद खुली। इसके पहले भी टेंडर डालने के दौरान फायरिंग की घटना हो चुकी है। देर शाम जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने एक्सईएन डीपी दुबे और कैशियर को तलब कर लिया। सूत्रों की मानें तो लोनिवि विभाग ने 60 कार्यो का टेंडर निकालने के बजाय महज सात कार्यो के लिए ही टेंडर निकाला था।
चार सड़कों पर टेंडर डालना बना बवाल का सबब
प्रतापगढ़। लोनिवि की चार सड़कों पर चार सड़कों पर रोक के बाद भी टेंडर डालना घटना का सबब बन गया। टेंडर डालने से डब्बू के गुर्गो ने रोका था। टेंडर डालने के दौरान कलेक्ट्रेट में तकरार हुई थी। जिसकी शिकायत की गई लेकिन अफसरों और पुलिस ने लापरवाही बरती। लोनिवि कार्यालय से सात सड़कों के लिए टेंडर निकाला गया था। जिसमे से एक काम रोक दिया गया था। छह कामों के लिए मंगलवार को टेंडर हुआ था। ठेकेदार ओसामा के घायल अधिवक्ता भाई जावेद का आरोप है कि चार सड़कों पर टेंडर डालने के लिए डब्बू व उसके गुर्गे रोक रहे थे। इसे लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय में दूसरे लोगों से तकरार भी हुई थी। करीब एक करोड़ की लागत से बनने वाली चार सड़कों पर विरोध के बाद भी ओसामा ने टेंडर डाल दिया था। जिसमे परैया नाला से लहुरी बजेठी मार्ग, कमासपट्टी मार्ग से मौर्या बस्ती संपर्क मार्ग, बाबूगंज चिलबिला मार्ग से गड़वारी मुस्लिम बस्ती संपर्क मार्ग और किशुनगंज मार्ग से मठिया यादव बस्ती जोगापुर मार्ग को लेकर विवाद पैदा होने की बात सामने आ रही है। बताते है कि मंगलवार को ही अधिकारियों व पुलिसकर्मियों से लोगों ने शिकायत की थी। इसके बाद भी पुलिस नहीं चेती। जिससे घटना हो गई।
अस्पताल में शहर कोतवाल से धक्कामुक्की
गोली लगने से घायल अधिवक्ता जावेद को लेकर साथी अधिवक्ता भागकर जिला अस्पताल पहुुंचे। सूचना मिलने पर शहर कोतवाल ज्ञान सिंह यादव पहुंच गए। उन्होंने मामले की जानकारी करने का प्रयास किया तो घायल अधिवक्ता के साथी उनसे भिड़ गए। आक्रोशित लोगों ने कोतवाल से भी धक्कामुक्की की। हालांकि सीओ सिटी व अन्य लोगों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
पिस्टल लेकर दौड़े प्रभारी एसपी स्वामीनाथ
प्रभारी पुलिस अधीक्षक स्वामीनाथ अपने कार्यालय में बैठकर फरियादियों की समस्या का निस्तारण कर रहे थे। लोनिवि कार्यालय में फायरिंग होते देख गेट पर मौजूद पुलिसकर्मी भीतर की ओर भागे और दूसरे पुलिसकर्मियों को घटना से अवगत कराया। फायरिंग की बात सुनते ही प्रभारी पुलिस अधीक्षक अपने हाथ में पिस्टल लेकर दौड़ पड़े। उनके पीछे गनर व कार्यालय के सिपाही भी घटनास्थल की ओर दौड़े। हालांकि उन लोगों को आते देख फायरिंग करने वाले भागने में कामयाब रहे। एक संदिग्ध युवक को पुलिस ने दबोचा, लेकिन बाद में उसकी कोई संलिप्तता न मिलने पर उसे छोड़ दिया गया।