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सरकार पर भारी पड़े शराब माफिया

Tue, 09 Dec 2014 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, प्रतापगढ़
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10 जुलाई 2014। जिले में कप्तान की कुर्सी संभालने वाले एसपी अनंतदेव को आखिरकार पांच महीने में ही रुखसत होना पड़ा। उन्हें हालांकि बुलंदशहर का कप्तान बनाया गया है लेकिन जिले से हटाए जाने से हर तबका स्तब्ध है। अपराधियों की नकेल कसने में जुटे एसपी के तबादले ने सरकार की कानून का राज स्थापित करने की मंशा पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। लोग खुलेआम कह रहे हैं कि शराब माफिया और अपराधी सरकार पर भारी पड़े। 
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एसपी अनंतदेव के लिए प्रतापगढ़ तीसरा जिला था। इससे पहले वे दो और जिलों में कप्तान रह चुके थे। कार्यभार ग्रहण करने के बाद कुछ मामलाें में उनकी तेजी ने जिले के लोगों को हैरत में डाल दिया था। व्यापारी नेता को लूट के मामले में जेल भेजने, तमाम विरोधों के बाद भी एक वकील का नाम शराब माफियाआें से न हटाने को लेकर वह हमेशा चर्चा में रहे। कुंडा सर्किल में करोड़ों की शराब बरामद होने के बाद तो हर दिन एसपी के तबादले को लेकर चर्चा गर्म थी। एसपी ने न केवल शराब माफियाआें पर शिकंजा कसा बल्कि कारोबारियों को संरक्षण देने की आशंका में कई थानेदाराें को भी पैदल कर दिया। दिवाली से एक दिन पहले सपा नेता विजय के भतीजे, राजीव की हत्या के मामले में पट्टी कोतवाल के निलंबन और एएसपी पूर्वी को हटाने के  फरमान के बाद तो उनकी भी कुर्सी की सलामती को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं।

पिछले दिनाें सदर से सपा विधायक नागेंद्र सिंह यादव मुन्ना के पिता के निधन पर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से डीएम के साथ एसपी के भी भी काम की सराहना की थी। इसके बाद यह माना जाने लगा कि डीएम, एसपी को यहां से हटाना किसी के लिए संभव नहीं होगा। हालांकि मुख्यमंत्री के जाने के एक पखवारे के अंदर ही एसपी के तबादले की खबर ने न केवल विभाग बल्कि जिले में भी खलबली मचा दी है।
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 एसपी का तबादला पूरे जिले में किसी सनसनी से कम नहीं है। मंगलवार शाम जैसे ही उनके तबादले की खबर मिली हर किसी का मोबाइल घनघनाने लगा। जिले की स्थिति से वाकिब लोगों का कहना था कि शराब की जो बरामदगी हुई पहले के भी अधिकारी जानते थे लेकिन किसी ने कार्रवाई नहीं की। एसपी अनंतदेव के कार्रवाई करने के बाद से ही लगने लगा था कि वह अब बहुत दिनों तक जिले के मेहमान नहीं होंगे।

 एसपी अनंत देव ने जिले के सभी लोगों को बता दिया कि क्या होता है कानून। अपराधियों के पक्ष में की गई किसी की भी सिफारिश उन्होंने नहीं मानी। अपने कार्यों से सामान्य से लेकर पहुंचवालों तक को बताया कि क्या होता है कानून। कई मामले तो ऐसे आए जिसमें लोगों को लगा कि यह कार्रवाई कुछ दिन बाद होनी चाहिए थी। मगर उन्होंने ऐसे लोगों की सिफारिश करने वालों से साफ कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं। कार्रवाई के लिए समय का इंतजार नहीं किया जाता।
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