गर्मी को देखते हुए शासन ने गांवों में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की निर्देश दिया है। गांव में लगे हैंडपंपों को ग्राम पंचायत की परिसंपत्ति मानते हुए इसे ठीक कराए जाने का आदेश दिया है। यदि सात दिन में नल नहीं बने तो ग्राम पंचायत अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है।
गर्मी आते ही गांव में लगे नल सूखने लगते हैं। कई गांवों में महीनों से नल कीचड़ उगल रहे हैं तो कुछ सूख चुके हैं। इसके चलते गांव के लोगों को पानी की समस्या होनी शुरू हो गई है। शासन ने इसे गंभीर से लिया है। उसने विकास खंडों को निर्देशित किया है कि वह गांव के नलों की मरम्मत सात दिन के अंदर कराएं। इसके लिए 14हवें वित्त और चतुर्थ खाते का उपयोग करें। यही नहीं इस खाते में पर्याप्त धनराशि भी उपलब्ध है। इसके चलते नलों की मरम्मत जल्द होनी चाहिए। यही नहीं निर्देश में कहा गया है कि इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होती है। ऐसे में उन्हें इस जिम्मेदारी को निभाने का प्रयास करना चाहिए।
गांव में यदि सात दिन तक कोई नल नहीं चला तो शिकायत होने पर ग्राम पंचायत अधिकारी की क्लास लगाई जा सकती है। दरअसल, गोतनी, सराय स्वामी, करेंटी, हथिगवां, किलहनापुर सहित दर्जनों गांव में अभी से पानी की समस्या खड़ी हो गई है। इन्हें रिबोर सहित मरम्मत की जरूरत है लेकिन कहीं कोई नल बनवा पाने में ग्राम पंचायतें अपने आप को अक्षम पा रहीं थीं।