सपनों की दुनिया को हकीकत में बदलने की आस लिए साढ़े तीन साल पहले सऊदी अरब गए प्रतापगढ़ के राशिद ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उसकी जिंदगी इस कदर नरक बन जाएगी। सऊदी के रियाद शहर में जिस कफील (मालिक) के यहां वह गाड़ी चलाने के लिए गया था, उसी ने उसे फंसा दिया। जुल्म और ज्यादती तो की है, उसकी वतन वापसी की राह में भी रोड़े अटका दिए। चार महीने तक वेतन नहीं दिया। उसकी मोबाइल छीन ली। इतने से भी जी नहीं भरा तो उसका एकामा (एग्रीमेंट) भी जमा करा लिया। हिन्दुस्तान की दूतावास में झूठी सूचना दे दी कि वह चार महीने से फरार है। अब राशिद दो-दो दिन तक बिना खाए-पिए भटक रहा है। उसने रियाद में रह रहे प्रतापगढ़ और इलाहाबाद के लोगों की मदद से घरवालों को वीडियो भेजकर अपनी दास्तां सुनाते हुए भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है।
मानधाता थाना क्षेत्र के अमैयामऊ निवासी राशिद अली 20 जुलाई 2013 को मुंबई से मिले वीजा पर सऊदी अरब के रियाद शहर के लिए रवाना हुआ। राशिद की मानें तो जिस वीजा पर वह वाहन चलाने गया था, वहां डेढ़ साल तक काम किया, लेकिन वादे के मुताबिक तनख्वाह नहीं मिलती थी। जिसके बाद वह कफील की मर्जी से दूसरी जगह नौकरी करने चला गया। वहां भी काम करता रहा, सितंबर में घर जाने की बात कही तो कफील ने कहा कि नवंबर में चले जाना। जब राशिद के घर जाने का समय आया तो कफील मुकर गया। उसने उसका एकामा जमा करा लिया। चार महीने तक सेलरी भी नहीं दी गई। इतना ही नहीं गाड़ी का जुर्माना होने पर उसकी तनख्वाह से दोगुने की कटौती की जाती रही। कफील ने दूतावास को झूठी सूचना दी कि वह चार महीने से गायब है। अब राशिद के पास खाने के लिए भी रुपये नहीं बचे हैं। वह दो-दो दिन बिना खाए रियाद में इलाहाबाद और प्रतापगढ़ के रहने वाले लोगों के पास किसी तरह छिपकर गुजारा कर रहा है। एकामा न होने की दशा में उसे पुलिस पकड़कर जेल भेज सकती है। उसने हिन्दुस्तान की एमबीसी से भी संपर्क साधा, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। रियाद में रह रहे यहां के लोगों की मदद से उसने किसी तरह घरवालों और परिचत लोगों को वीडियो भेजकर मदद की गुहार लगाई है। उसने हिन्दुस्तान की हुकूमत और विदेश मंत्रालय से वतन वापसी की गुहार लगाई है।