तीन दशक से अधिक समय तक अपने हाथों के हुनर से प्रसव पीड़िताओं के चेहरे पर मुस्कान लाने वाली दाई बिट्टन दुनिया से सदा के लिए विदा हो गईं। उनके घर में खाने का एक दाना नहीं था। गांव के लोग भूख से मौत होने का शोर मचाया तो मौके पर पहुंचे अफसर उसकी मौत बीमारी से होने की सफाई देने लगे।
जनपद इलाहाबाद के मऊआइमा थाना क्षेत्र के बागी निवासी बिट्टन देवी अपने पति सुखराम की मौत के बाद बीठलपुर में आकर बस गईं। वह दाई का काम करती थीं। इसलिए पुराने अस्पताल में उनका ठौर बन गया। करीब तीन दशक से अधिक समय तक वह आसपास के गांव की प्रसव पीड़िता के लिए दाई का काम करने वाली बिट्टन किसी डाक्टर से कम नहीं थी। प्रसव कराने के लिए गांव के लोग उन्हें बुलाकर ले जाया करते थे। करीब एक महीने से उसकी तबियत खराब थी। सोमवार को गांव के लोग उसका हाल लेने पहुंचे। देखा तो चारपाई पर वह मृत पड़ी थी। यह देख लोगों ने शोर मचाया। आनन-फानन में डाक्टर को बुलाया गया। उसने देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। लोग उसकी मौत भूख से होने का शोर मचाने लगे। घर में अनाज का एक दाना नहीं था। बर्तन काफी दिनों से पड़े थे।
सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार व कानूनगो समेत अन्य तहसीलकर्मी मौके पर पहुंचे। वे उसकी मौत भूख से होने की बात सेइनकार करते हुए बोले कि बीमारी से उसकी मौत हुई है। गांव के लोग उसे हर दिन खाना देते थे और देखभाल करते थे। गांव के चौकीदार को उसके शव का अंतिम संस्कार मंगलवार को कराने का निर्देश देकर अफसर लौट गए।