निराश्रित महिलाओं के नाम पर खोले गए शहर के दो स्वाधार आश्रय गृहों में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जी नामों के जरिए लंबा गोलमाल किया गया है। प्रशासन की जांच में दोनों आश्रय गृहों में 20 महिलाओं के नाम काल्पनिक मिले हैं। प्रशासन की जांच से घबराई अचलपुर आश्रय गृह की अधीक्षिका केंद्र बंदकर रात में ही भाग निकली। प्रशासनिक कार्रवाई से हड़कंप मचा रहा।
शहर के अष्टभुजानगर और अचलपुर में दो महिला स्वाधार गृहों का संचालन होता है। बुधवार को दिन व रात के समय डीएम की गठित टीम की छापेमारी में 26 महिलाएं गायब मिली थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए गुरुवार को जिलाधिकारी शंभु कुमार ने एसडीएम सदर एसपी सिंह की अगुवाई में छह सदस्यीय टीम को जांच के लिए भेजा। एसडीएम सदर दोपहर एक बजे अचलपुर स्थित मैक्सन ग्रामोद्योग द्वारा संचालित स्वाधार आश्रय गृह की जांच करने पहुंचे। वहां अधीक्षिक नेहा परवीन केंद्र बंदकर रात में ही जा चुकी थी। गेट पर आश्रय गृह बंद होने का ताला लगा था। वहां मौजूद काउंसलर साजिदा सब्बाग से एसडीएम और तहसीलदार न्यायिक श्रद्धा मिश्रा ने पूछताछ शुरू की। वहां पर चार महिलाएं मिलीं। अधिकारियों की पूछताछ में वह टूट गई। उसने बताया कि वह दो साल से यहां काम करती है। यहां पर केवल चार महिलाएं ही रहती हैं। 11 महिलाओं के नाम काल्पनिक हैं। जिनकी हर माह रिपोर्ट भेजी जाती थी। इससे अधिक उसे कोई जानकारी नही है। रजिस्टर में हेराफेरी भी गई थी। अभिलेखों को कब्जे में लेने के बाद टीम अष्टभुजानगर स्थित जागृति महिला स्वाधार आश्रय गृह पहुंची। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जांच शुरू हुई। यहां पर भी फर्जीवाड़ा सामने आया। कई घंटे की जांच के बाद 9 महिलाओं का पता नहीं चल सका। आश्रय गृह पर 17 महिलाओं के रहने का ब्योरा दर्ज था। केंद्र पर काम करने वाले कर्मचारी भी जांच टीम के सामने नहीं आए। हालांकि आश्रय गृह संचालिकाओं के खिलाफ देर शाम तक कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी।
स्वाधार आश्रय गृहों में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। 20 महिलाओं के नाम काल्पनिक मिले हैं। इसकी रिपोर्ट शासन और बाल एवं महिला कल्याण विभाग को भेज दी गई है। शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शंभु कुमार, जिलाधिकारी।