ठंड की शुरुआत हो चुकी है। कोहरा भी अब ठंडी हवा के साथ अपनी चादर फैलाने लगा है। शहर में खुले आसमान के नीचे रहने वाले लोगों की रात अब ठिठुरने लगी है। लेकिन इन लोगों के लिए सहारा बनने वाले रैन बसेरों की तैयारी अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
सर्द हवाओं ने शरीर में सिहरन भरनी शुरू कर दी है। नवंबर माह से शुरू हुई ठंड ने दिसंबर के शुरूआत से ही लोगों को तकलीफ पहुंचानी शुरू कर दी है। दिन में सूरज की तपिश भी अब सुहानी लगती है। सुबह-शाम के साथ ही रात में कोहरे के साथ सर्द हवाएं लोगों को कंपा रही हैं। बावजूद इसके अभी प्रशासन और नगर पालिका ने फुटपाथ पर गुजर-बसर करने वाले लोगों के लिए रैन बसेरे की तैयारी ही नहीं की है। खुली छत के नीचे व बड़ी-बड़ी होर्डिंगों के नीचे रहने वालों के लिए आफत का समय आ गया है। इसके अलावा झुग्गियों के नाम पर बांस पर पन्नी तानकर रहने वाले भी इस समस्या से दो-चार होने लगे हैं। नगर पालिका व नगर पंचायत इन लोगों को ठंड से बचने के लिए जगह-जगह रैन बसेरे बनाकर छत दिलाती है। इसमें बाहर से आने वाले वे लोग भी शामिल होते हैं जो यहां सिर्फ मजदूरी करने आते हैं और सड़क के किनारे ही सो जाते हैं। इस बार नगर पालिका ने अभी तक इसकी तैयारी शुरू ही नहीं की है।
शीतलहर और कड़ाके की ठंड आने पर इसे तैयार किया जाता है। अभी उस तरह की ठंड नहीं है फिर भी इसे जल्द ही तैयार करवाया जाएगा।
अवधेश यादव, अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका।