नोटबंदी के 45 दिन बाद भी नकदी की समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर के 17 एटीएम ऐेसे हैं, जिनके शटर नोटबंदी के बाद उठे ही नहीं हैं। बैंकों में उमड़ने वाली भीड़ रुपये के लिए जहां जूझ रही है, वहीं व्यापारियों का धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है।
आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद पैदा हुआ नगदी का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बेल्हा में नोटबंदी का असर आम लोगों के साथ ही व्यापारियों पर भी भारी पड़ रहा है। बैंकों का आलम यह है कि वह व्यक्ति को पहचान कर रुपये दे रहे हैं। नोटबंदी के 45 दिन बाद भी एटीएम के हालात नहीं सुधरे हैं। शहर में विभिन्न बैकों के 21 एटीएम हैं। इसमें एसबीआई के सबसे अधिक आठ एटीएम हैं। इनमें से सिर्फ दो एटीएम ऐसे हैं, जो रुपये उगल रहे हैं, बाकी एटीएम के शटर डाउन हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, पीएनबी, इंडियन ओबरसिरीज बैंक, ओबीसी, यूको बैंक, केनरा बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अधिकांश एटीएम में ताले लग गए हैं। तहसील और कस्बों में लगे एटीएम तो 45 दिनों से खिलौना बने हुए हैं।
संडवा चंद्रिका इलाके के बझान गांव निवासी राम अकबाल सिंह और राजेश सिंह की मानें तो ग्रामीण इलाकों में लगे एटीएम पूरी तरह निरर्थक साबित हो रहे हैं। नोटबंदी के बाद से एटीएम के शटर ही नहीं उठे हैं।
आठ बजे के बाद बेल्हा में नहीं मिलता कैश
शहर के जो एटीएम चल भी रहे हैं, शाम के आठ बजते ही उनकी शटर डाउन हो जाती है। इससे रात में किसी भी व्यक्ति को कैश नहीं मिल सकता है। हालांकि यह समस्या आठ नवंबर के बाद उत्पन्न हुई है। इसके पूर्व चौबीस घंटे एटीएम चलते थे और आम लोगों को रुपये निकालने में कोई परेशानी का सामना नहीं करना होता था।
आज और कल बैंकों में रहेगा अवकाश
जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में शनिवार और रविवार को अवकाश रहेगा। इससे जिले के लोगों को नकदी के लिए दो दिन परेशानी का सामना करना होगा। इस दौरान एटीएम से रुपये मिलने की संभावना कम ही है, हालांकि एसबीआई का दावा है कि उसके एटीएम से रुपये मिलते रहेंगे।