मथुरा के जवाहरबाग कांड में कुंडा का भी एक व्यक्ति लापता हो गया है। वह बहुत पहले से जय गुरुदेव का भक्त था। उनकी मौत के बाद वह रामवृक्ष के विचारों का समर्थक हो गया था। यही नहीं वह काफी दिन से रामवृक्ष के साथ ही जवाहरबाग में रह रहा था। कस्बे के प्रेमनगर मुहल्ला निवासी दीपचंद्र गुप्ता (55) बचपन से ही जयगुरुदेव का भक्त था। वह कस्बे में रानी गिरजादेवी स्कूल के सामने चाट की दुकान लगाता था। जयगुरुदेव की मौत के बाद 2013 में रामवृक्ष यादव कुंडा की महुआरी बाग में आया था। यहां उसने तमाम लोगों को संबोधित किया था। इस दौरान दीपचंद्र भी उसके संपर्क में आया और फिर दुकान और घर की जिम्मेदारी बच्चों को देकर मथुरा चला गया।
वहां वह रामवृक्ष के साथ ही रहता था। मई में वह घर आया था। इसके बाद पत्नी सुमित्रा को घुटने में दर्द होने के कारण वह 12 मई को जवाहरबाग में ही इलाज कराने के नाम पर बेटी आरती के साथ ले गया था। वहां कुछ दिन इलाज कराने के बाद वहां के माहौल को देखकर सुमित्रा ने बेटों से वापस बुलाने की बात कही थी। इस पर उसके बेटों ने कस्बे के ही एक व्यक्ति को टिकट निकलवाकर मां और बहन को लेने के लिए भेजा था। सुमित्रा बताती हैं कि घटना से महज कुछ ही देर पहले वह लोग स्टेशन के लिए निकले थे, जबकि दीपचंद्र दो बजे खाना खाने के बाद से ही गायब हो गया था। इसके बाद वह न तो उन्हें छोड़ने स्टेशन आया और न ही उनके जाने के दौरान मिलने के लिए आया। घटना के बाद से उसका मोबाइल बंद बता रहा है। इधर, उसके बेटे हीरानंद, आशीष, मनीष और बेटियां आरती, मंजू, अंजू, संजू और रेनू उसके हाल को लेकर चिंतित हैं।
थोड़ी देर और रुकते तो तीनों की जाती जान
थोड़ी देर की ही बात थी अगर तीनों रुक जाते तो वह भी वहां होने वाली घटना के शिकार हो जाते। दीपचंद्र की बेटी आरती, उसकी पत्नी सुमित्रा और उनके साथ रहा कस्बे सजनलाल गुप्ता इस घटना के शिकार हो सकते थे। उन्होंने बताया कि वह स्टेशन के पास पहुंचे थे तो आग लगने की घटनाएं होने लगी थीं। यही नहीं लगातार उठ रहे धुएं के बारे में लोग बात कर रहे थे, लेकिन यह मान लिया गया था कि कहीं आग लगी होगी। यह तो बाद में पता चला कि वहां गोलियां चलने के बाद आग लगी थी।
परिवार के लोग करते थे उसके विचारों का विरोध
प्रेमनगर में रहने वाले दीपचंद्र गुप्ता जय गुरुदेव का भक्त होने के कारण पहले टाट का कपड़ा पहनते थे। जब उनकी मुलाकात रामवृक्ष से हुई तो उन्होंने इस तरह के कपड़े पहनने से परहेज कर दिया था। इसके बाद उसके विचार सुनकर उनके दो भाई और परिवार के लोग भी उनका विरोध करते थे। यही नहीं उनकी आजादी और करेंसी के बारे में होने वाली बातें तो उन्हें समझ में नहीं आती थीं लेकिन उनकी बात से जयगुरुदेव के विचारों से न मिलने की बात पर पूरा परिवार नाराज रहता था। यही नहीं वह रामवृक्ष से मिलने के बाद परिवार की जिम्मेदारी भी भूल गया था और लगातार मथुरा के जवाहरबाग में ही रहता था।