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पोल पर चढ़े संविदाकर्मी लाइनमैन की करंट से मौत

Sun, 08 Apr 2018 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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लाइनमैन की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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शहर के विद्युत उपकेंद्र दहिलामऊ संविदाकर्मी लाइनमैन की बिजली के पोल पर काम करने के लिए दौरान करंट की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। साथी कर्मचारी मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल ले गए। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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नगर कोतवाली के भदोही रायपुर कला निवासी रामलखनऊ काका (58) दहिलामऊ विद्युत उपकेंद्र पर संविदाकर्मी लाइनमैन के रूप में कार्यरत था। रविवार की सुबह वह परिवार के लोगों से हर दिन की तरह यह कहते हुए निकला कि अपनी रोजी रोटी पर जा रहा हूं। घर का काम पूरा कर लेना ताकि कोई समस्या न हो।

वह अपने समय पर विद्युत उपकेंद्र दहिलामऊ पहुंचा। यहां विद्युत उपकेंद्र के एसएसओ रविंद्र सिंह के पास शिकायत आई कि पूरे ईश्वरनाथ जाने वाली हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गिरा हुआ है। जिसे अटेंड करने के लिए एसएसओ ने उसे मौके पर हकीकत देखने के लिए भेजा। पूरे ईश्वरनाथ फीडर की आपूर्ति ठप कर दी गई। रामलखन ने साइड देखने के बाद एसएसओ को जानकारी दी कि बिना रस्सा और क्लैंप के काम नहीं होगा।
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दूसरे कर्मचारियों से सामान भेजा जाए , ताकि टूटा तार जोड़ा जा सके। कुछ देर में रामलखन अष्टभुजानगर मोड़ के पास पहुंच गया। लोगों की मानें तो वह 11 हजार की लाइन पर लगे ट्रांसफार्मर वाले बिजली के पोल पर चढ़ गया। अचानक वह सगरा वाले फीडर की लाइन में आपूर्ति हो रहे करंट की चपेट में आ गया। हाथ में तार छूने के कुछ पल बाद वह जमीन पर गिरा और कुछ देर तड़पने के बाद उसकी मौत हो गई।

सूचना पर कोतवाली पुलिस के साथ ही साथी कर्मचारी पहुंचे और उसे लेकर जिला अस्पताल आए। यहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस बीच पहुंचे घरवाले रोने बिलखने लगे। बाद में पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कुछ देर बाद वहां एसडीओ नगर, जेई आरके मौर्या, कर्मचारी नेता हेमंत नंदन ओझा अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार से एक्सईएन की बातचीत कराते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

केबिल जोड़ने की लालच में गंवा दी जान
बिजली विभाग में शिकायत मिलने के बाद लाइन चेक करने के लिए भेजे गए संविदाकर्मी लाइनमैन रामलखन काका के पास खामी दूर करने के लिए कोई संसाधन नहीं था। उसके पास केवल प्लास था। न तो हाथ में पहनने के लिए दस्ताना था और न ही सूखे बांस की सीढ़ी। बिजली की लाइन पर काम करने के दौरान उसने चप्पल पहन रखी थी। विद्युत उपकेंद्र के एसएसओ की मानें तो घटना के समय पूरे ईश्वरनाथ फीडर की लाइट बंद थी। सगरा फीडर की लाइन चालू थी। जिसकी चपेट में आने से लाइनमैन की मौत हुई है।

किसकी थी लोहे की सीढ़ी
हाईटेंशन लाइन विद्युत पोल पर काम करने के लिए संविदाकर्मी लाइनमैन रामलखन काका ने ऊपर चढ़ने के लिए लोहे की सीढ़ी का प्रयोग किया था। जो आसपास रहने वाले लोगों की थी लेकिन पूछने पर सभी को सांप सूंघ गया था। कोई सीढ़ी के बारे में बताने वाला नहीं था। इससे अंदेशा लगाया जाता जिस व्यक्ति ने सीढ़ी मुहैया कराई थी। उसकी लाइन ठीक करने के लिए ही संविदाकर्मी लाइनमैन बिजली के पोल पर चढ़ा था। मृतक का एक बेटा सत्येंद्र भी कर्मचारी है। जबकि दो बेटे रिंकू व मोनू की शादी नहीं हुई । तीन बेटियों की शादी रामलखन कर चुका है। शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया।

मदद मिलने के बाद ही होगा अंतिम संस्कार
संविदाकर्मी लाइनमैन रामलखन काका के शव को पोस्टमार्टम के बाद विद्युतउपकेंद्र दहिलामऊ लाया गया। यहां परिवार के लोग आर्थिक मदद समेत अन्य मांगे पूरा करने की बात कहने लगे। अधिकारियों ने वादा किया कि रविवार होने के कारण कार्यालय बंद है। सोमवार को उसे आर्थिक मदद मिलेगी। परिवारीजनों ने कहा कि मदद मिलने तक वे लोग अंतिम संस्कार नही करेंगे। इस दौरान दो लोगों के बीच कहासुनी होने लगी, जिन्हे पुलिस ने हटाया।

अब तक 10 लाइनमैन गंवा चुके हैं जान
विद्युत उपकेंद्रों पर तैनात संविदाकर्मी लाइनमैन बेहद मुश्किल परिस्थितियों में काम करते हैं। अफसरों को इतनी भी फुर्सत नहीं होती कि जान जोखिम में डालकर काम करने वाले कर्मचारियों को काम करते देख सकें। ताकि उनकी दिक्कतों को दूर करते हुए उन्हें सुरक्षा के लिए संसाधन मुहैया कराया जा सके। मेहनताना समय पर न मिलने के कारण वे बराबर अपनी जिंदगी दांव लगाते हैं ताकि परिवार का खर्च चला सकें।

बिजली विभाग के अफसरों के पास इतना भी समय नहीं रहता कि वे अपने मातहतों की कारगुजारी देख सकें। सरकारी व संविदाकर्मी किस तरह अपनी जान हथेली पर लेकर काम कर रहे हैं। उनके पास सुरक्षा के संसाधन मौजूद हैं कि नहीं। काम करने के दौरान कर्मचारियों को किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए। ये सब बातें केवल हादसों के बाद ही अफसरों को याद आती हैं। घटनाओं की प्रतिक्रिया से बचने के लिए पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद के साथ परिवार के किसी व्यक्ति को संविदा पर काम करने का वादा कर लिया जाता है।

लाइन की फाल्ट दूर करने के लिए सभी को दस्ताना, जूता समेत अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाने का दावा भी किया जाता है लेकिन हकीकत इससे इतर होती है। घटनाओं के बाद आरोप लगता है कि सरकारी हो या संविदाकर्मी लाइनमैन को समय पर मानदेय तक नहीं मिलता। संसाधन का बजट भले ही शासन से मिलता हो। इसका बंदरबांट तक करने में अफसर पीछे नहीं रहते।

कुछ दिनों पहले दहिलामऊ निवासी जंगे और बाबागंज विद्युतउपकेंद्र में काम करने वाले महफूज हसन उर्फ बब्बू के अलावा दस से अधिक संविदाकर्मी लाइनमैन और कुली की जान जा चुकी है। बहुत से लोग करंट की चपेट में आने से झुलसकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर चुके हैं। कभी तीन माह तो कभी छह माह में लाइनमैन को 7900 रुपये और कुली को 6400 रुपये मिलते हैं। जिससे परिवार के गुजर बसर के लिए ऐसे कर्मचारियों को सौ-दो सौ रुपये के लिए हाथ पैर चलाना पड़ता है। छोटी मोटी खराबियों को दूर करने के लिए वे अपने गुजर बसर के लिए जिंदगी दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटते।
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