इलाहाबाद की कचहरी में अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या के विरोध में भड़के वकीलों ने सरकारी कार्यालयों में तालाबंद कराकर नारेबाजी की। पुलिस तिराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों से नोकझोंक भी हुई। बवाल की आशंका से कई थानों की पुलिस एसपी कार्यालय से लेकर पुलिस लाइन तक मुस्तैद रही।
इलाहाबाद प्रकरण को लेकर गुरुवार को जनपद के अधिवक्ता आंदोलित हो उठे। नारेबाजी करते हुए वकीलों ने जनपद न्यायाधीश को हड़ताल का प्रस्ताव दिया। इसके बाद दीवानी परिसर में नारेबाजी करते हुए काम काज बंद कराया। कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी पुनीत शुक्ला अपने चैंबर में बैठे थे। इससे नाराज अधिवक्ता कार्यालय में घुसे और एडीएम को कार्यालय से बाहर निकालने के बाद ताला बंद करा दिया। कोषागार समेत सभी सरकारी कार्यालयों में काम-काज करने आए कर्मचारियों को भी कार्यालय से बाहर निकालकर वकीलों ने ताला जड़ दिया। इसके बाद वकील नारेबाजी करते हुए पुलिस लाइन तिराहे पर पहुंचे। इस दौरान रोडवेज की बसों को रोकने के साथ ही दूसरे वाहनों का भी आवागमन बंद करा दिया। अधिवक्ता इस कदर आक्रोशित थे कि साइकिल सवार लोगों का भी रास्ता बंद कर दिया। इस बीच पुलिस लाइन के गेट पर एसओ जेठवारा, एसओ कंधई, आरआई भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। बवाल की आशंका के चलते पुलिसकर्मी बराबर नजर रखे हुए थे। करीब पौन घंटे तक चले जाम से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान वकीलों और पुलिस लाइन गेट पर मौजूद पुलिसकर्मियों से झड़प भी हुई।
हालांकि दूसरे वकीलों ने सभी को समझा बुझाकर शांत कराया। इस दौरान पुलिस जाम लगाने वाले अधिवक्ताओं को कैमरे में कैद करते रहे। इसके बाद अधिवक्ता जाम समाप्त कर कचहरी चले गए। वहां वकीलों ने आमसभा के जरिए मृत अधिवक्ता को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए पुलिसिया तांडव पर आक्रोश जताया। इधर, पुलिस कार्यालय में एएसपी तारिक मोहम्मद, एडीएम पुनीत शुक्ला, एसडीएम जेपी मिश्रा, सीओ सिटी एमपी सलोनिया, शहर कोतवाल बलिराम मिश्रा, सांगीपुर एसओ एमपी तिवारी पीएसी के जवानों के साथ मुस्तैद रहे।