चिलबिला रेलवे स्टेशन के आउटर पर दो दिन पहले सात माह की एक मासूम बच्ची तड़पती हुई मिली। उसके शरीर पर चोट के निशान थे। पैर में सूजन था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। कुपोषण केंद्र में भर्ती कर डाक्टर उसका इलाज कर रहे हैं। उसके पैर में फ्रैक्चर होने की आशंका जताई जा रही है। बच्ची की शिनाख्त नहीं हो सकी है। वह ट्रेन से गिरी या फिर किसी ने उसे यहां लाकर फेंक दिया, इसे लेकर संशय बना हुआ है।
शहर से सटे चिलबिला रेलवे क्रासिंग के निकट आउटर पर दो दिन पहले सात माह की एक बच्ची दर्द से चीख रही थी। उधर से गुजर रहे राहगीर आवाज सुनकर रुक गए। उसकी हालत देखकर लोगों का कलेजा कांप उठा। राहगीरों ने इसकी खबर चिलबिला चौकी पुलिस को दी। पुलिस बच्ची को उठाकर अस्पताल ले आई। यहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मोहित शुक्ला ने उसका इलाज शुरू किया। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले। एक पैर में सूजन था। डॉक्टर मोहित की मानें तो उसके एक पैर में फ्रैक्चर है, लेकिन तस्वीर एक्सरे के बाद ही साफ हो सकती है। अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्ची का तन ढकने के लिए ऊनी कपड़े खुद के पैसे से मंगवाए।
उसे पहनाकर कुपोषण पुर्नवास केन्द्र में भर्ती कराया। लावारिस मासूम बच्ची का समय-समय पर इलाज करने के साथ पेट भरने के लिए दूध भी अस्पताल कर्मचारी ही दे रहे हैं। अब इस बात को लेकर असमंजस बना हुआ है कि उसे कौन वहां फेंक गया। अगर फेंका गया तो उसे इतनी चोटें कैसे आईं। क्या उसे किसी ने मारा था। इस बारे में नगर कोतवाल का कहना था कि उसे कोई छोड़कर भाग गया।