डेरा अदमखेल जहां स्मार्टफोन से सस्ते दामों पर मिलती हैं बंदूकें
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एसटीएफ व मऊआइमा पुलिस के हत्थे चढ़े हाफिज मारूफ के असलहा तस्करी में शामिल होने की जानकारी मिलने पर सब हैरत में हैं। एक वर्ष पूर्व गांव में हुई घटना के बाद उसे जेल भेजा गया था। जुलाई 2016 में जमानत पर छूटा तो मदरसे में उसे नौकरी नहीं मिली। हालांकि वह बराबर प्रयास करता रहा। पुलिस के मुताबिक उसने पूछताछ में कबूला है कि वह मदरसे से ही असलहों की तस्करी करता था।
एसटीएफ व मऊआइमा पुलिस ने मंगलवार की रात लालगंज कोतवाली के गाबी महुआबन गांव के हाफिज मारूफ व उसके भाई रऊफ को दबोच लिया था। उनके पास से बड़ी संख्या में असलहे बरामद हुए थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को जेल भेज दिया। इस बात की जानकारी कादीपुर स्थित मदरसा के प्रिंसिपल और तालीम हासिल कर रहे बच्चों के साथ ही गांव के लोगों को हुई तो सभी हैरत में पड़ गए। वे हाफिज मारूफ की करतूत से दंग थे। लोगों को इस बात का यकीन ही नहीं हो रहा था कि तालीम देने वाला हाफिज असलहों की तस्करी करता था।
मदरसे के प्रिंसिपल मौलाना फारूख ने बताया कि हाफिज मारूफ मदरसे में बच्चों को तालीम जरूर देता था लेकिन गत वर्ष जून माह में उसका पड़ोसियों से विवाद हो गया। गोली से बहुचरा का एक युवक घायल हो गया था। इसे लेकर गाबी महुआबन में भी आगजनी के साथ ही जमकर बवाल हुआ था। पुलिस ने मारूफ की लाइसेंसी बंदूक कब्जे में लेने के साथ ही उसे जेल भेज दिया था।
जमानत पर वह जुलाई 2016 में छूटा और फिर मदरसे में पढ़ाने के लिए आया लेकिन उन्होंने उसे नौकरी देने से इनकार कर दिया। उसके स्थान पर बच्चों को तालीम देने के लिए दूसरे हाफिज की तैनाती कर ली गई थी। फिलहाल तालीम हासिल करने वाले बच्चों से लेकर मारूफ को जानने वाले भी उसकी करतूत की खबर सुनकर दंग हैं।