अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को बीपीएल सूची से नाम हटाए जाने पर विरोध प्रदर्शन करते खानपुर मौहरिया के ग्रामीण।
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बीपीएल राशनकार्ड बनाने में कोटेदारों ने व्यापक स्तर पर खेल किया है। करीबियों को बीपीएल का कार्ड तो विरोधियों को एपीएल का झुनझुना थमा दिया गया है। कोटेदारों के इस खेल में कुछ ऐसे गरीब भी पिस गए हैं, जिन्हे दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से नसीब होती है। सत्यापन के दौरान ऐसे मामले सामने आने पर विभागीय अधिकारी भी चकरा जा रहे हैं। बीते दिनों हुए सत्यापन में 38,423 अपात्रों के मिलने पर उन्हें योजना से बाहर किया गया था।
गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत दो रुपये किग्रा गेहूं और तीन रुपये किग्रा चावल प्रदान किया जाता है। एक युनिट पर पांच किग्रा मिलने वाले राशन को बांटने में कोटेदार खेल कर रहे हैं। नियमित रूप से राशन का वितरण नहीं करने वाले कोटेदारों के खिलाफ आए दिन धरना-प्रदर्शन होता है। कोटेदारों के खिलाफ कोई आवाज न उठा सके, इसके लिए वह बवाल करने वालों को पहले ही योजना से बाहर करने का खेल प्रारंभ कर दिए हैं। दरअसल कुछ कोटेदारों को ही जांच का भी जिम्मा दे दिया गया है। जिला पूर्ति कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी होने के कारण कोटेदारों से गांव के पात्र लोगों का नाम कंप्यूटर में फीड कराने को कहा गया है। इसका नाजायज लाभ उठा रहे कोटेदार अपने और प्रधान के करीबियों का नाम तो फीड करा रहे हैं, लेकिन अन्य लोगों को एपीएल बताकर योजना से बाहर कर दे रहे हैं।
डीएम के आदेश पर जिले भर में हुई खुली बैठक में 38,423 अपात्रों के मिलने पर उन्हें योजना से बाहर कर दिया गया था। अब इनके स्थान पर पात्रों का चयन होना है। ग्राम पंचायतों ने सूची तैयार कर विभाग में भेज दिया है, मगर लाभार्थी का चित्र, आधार नंबर, खाता नंबर, मतदाता पहचान पत्र की प्रतियां नहीं देने के कारण उनका नाम योजना में शामिल नहीं हो पा रहा है। कोटेदार जिस व्यक्ति को अपना समझ रहे हैं, उनके कागजात लाकर कंप्यूटर में फीड करा रहे हैं, बाकी को अपात्र बताकर योजना से बाहर किया जा रहा है। कर्मचारियों की कमी से विभाग भी उनकी नजरों से ही देख रहा है।