इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ की जा रही लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। शिकायत के बाद भी कोई सुधार विवि की ओर से नहीं किया जा रहा है। शुक्रवार को बीए प्रथम वर्ष के संस्कृत प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा थी। परीक्षा में वैकल्पिक प्रश्न आए थे, लेकिन प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट में दिए गए विकल्प में अंतर था। ऐसे में परीक्षार्थी परेशान हो उठे।
परीक्षा में प्रश्नपत्र मिलने के बाद परीक्षार्थियों ने एक प्रश्न के पांच ए, बी, सी, डी और ई विकल्प देखे। उसके बाद ओएमआर शीट पर केवल चार ही विकल्प देख परीक्षार्थी परेशान हो गए। ऐसे में प्रश्नपत्र में ई विकल्प प्रकाशित न होने से परीक्षार्थी असमंजस में फंस गए। केंद्राध्यक्षों ने मामले की शिकायत कुलसचिव से की। केंद्राध्यक्षों का कहना है कि उन्हें निर्देश गया कि पांचवें विकल्प का उत्तर देने के लिए डी के आगे काला गोला बना दिया जाए या डी को ही काला कर दिया जाए।
उसे सही उत्तर मान लिया जाएगा। विश्वविद्यालय की इस लापरवाही सेप परीक्षार्थियों में रोष रहा। कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने बताया कि पांचों विकल्प में केवल चार विकल्प में से से ही उत्तर देना था। यदि किसी प्रश्न का उत्तर विकल्प ई होता है तो उसके लिए परीक्षा समिति का छात्रहित में लिया गया निर्णय मान्य होगा।