शहर में शापिंग माल के साथ ही बड़े मार्केट भी बन गए हैं। कई मुख्य मार्ग पर हैं तो कुछ संकरी गलियों में। लेकिन ग्राहकों के लिए ही कोई व्यवस्था नहीं की गई। कुछ प्रतिष्ठान पार्किंग का दावा जरूर करते हैं, लेकिन हर जगह गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी की जा रही हैं।
कचहरी के इर्द-गिर्द शापिंग माल व शापिंग कॉपलेक्स खुल गया। शापिंग मॉल के पार्किंग स्थल पर दुकानें हैं। ग्राहकों की मोटरसाइकिल मुख्य मार्ग पर खड़ी हेाती हैं। चार पहिया के लिए तो कोई जगह ही नहीं। राजा प्रताप बहादुर पार्क, पंजाबी मार्केट, इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर हादीगंज में खुले शापिंग माल में भी लोगों के वाहनों के लिए पार्किंग का इंतजाम नहीं है। इसके चलते ग्राहक अपनी ही गाड़ी को निकालने में झल्ला जाते हैं। कभी कभार तो हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। जो सुरक्षाकर्मी मॉल की रखवाली के लिए हैं वे केवल गेट पर ही नजर आते हैं। उनका मोटरसाइकिल व कार की पार्किंग से कोई लेना देना नहीं रहता। कमोवेश यही हाल नए बने मार्केट का है। बाबागंज में कई मार्केट खुल गए हैं। मोबाइल हब के साथ दूसरे मार्केट में ही हमेशा भीड़ रहती है। लोग अपनी मोटरसाइकिलें सड़क पर खड़ी कर देते हैं। इससे लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कार्रवाई करना भी मुनासिब नहीं समझते
शापिंग मॉल व मार्केट खोलने के पहले संबंधित तहसील और नगर पालिका या फिर नगर पंचायत से सभी को लाइसेंस लेना होता है। इसके लिए पहले वे प्रार्थना पत्र देते हैं। इसमें वाहनों की पार्किंग, अगिभनशमन यंत्र की उपलब्धता समेत मानक पूरा करने का शपथ पत्र दिया जाता है। लाइसेंस मिलते ही हलफनामा देने वाले संचालकों की हकीकत सामने आने लगती है। उनके संस्थानों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला दिखने लगता है। लाइसेंस देने के बाद उस ओर संबंधित अधिकारी जांच कर कार्रवाई करना भी मुनासिब नहीं समझते।
ताक पर पुलिस अधीक्षक का आदेश
कई जगहों पर शापिंग मॉल, बैंक और मैरिज हाल के बाहर एसपी के आदेश की खुलेआम धज्ज्यिां उड़ाई जा रही हैं। खुद उनके मातहत भी उनके निर्देशों का पालन नहीं करा पा रहे हैं। इन जगहों पर एक बोर्ड पर पुलिस अधीक्षक का निर्देश लिखा है कि यहां वाहनों की पार्किंग नहीं की जा सकती है। ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन होता इसके उल्टा है। सबसे ज्यादा बाइक की कतारें यहीं लगती हैं और रोज लोग जाम में पिसते हैं।