एक दिसंबर को पेंशन लेने प्रधान डाकघर पहुंचे कर्मचारियों को महज दो-दो हजार रुपया कैश मिल सका। गुरुवार को डाकघर में बैंक से कैश न आने से लोगाें को काफी दिक्कतें आईं। डाकघर में पहले से पड़े कैश से लोगों को थोड़ा-थोड़ा देकर निपटाया गया। पेंशनरों और बाकी लोगों को दो-दो हजार रुपये का भुगतान किया गया। सुबह से पूरी पेंशन के इंतजार में बैठे कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी। दोपहर को वे महज दो हजार हाथ में लेकर घर पहुंचे। कैशलेस होने से डाकघर पेंशनरों को उनको पूरा पैसा नहीं दे सका। एक तरह से एक दिसंबर का दिन उनके लिये राहत से भरा साबित नहीं हुई। उधर, डाककर्मियों को उनके वेतन में से केवल दो-दो हजार रुपये ही कैश मिले। जिससे उनको भी समस्या झेलनी पड़ी।
नोटबंदी के बाद से सबसे अधिक दिक्कत सैलरी व पेंशन लेने कर्मचारियों को उठानी पड़ी। उनको उम्मीद थी कि शायद तीस नवंबर के बाद नोटबंदी से आई समस्या कुछ कम हो जाए। बैंकों और डाकघर से राहत मिलेगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। बैंकों और डाकघर में एक दिसंबर का दिन कैशलेस के नाम रहा। पैसा न आने से पेंशनरों के सामने सबसे अधिक दिक्कत आई। जिनके घरों में हर महीने आने वाली पेंशन का ही सहारा है। हर महीने की तरह पहली तारीख को पेंशन लेने डाकघर पहुंचे तो पता चला कि डाकघर में कैश नहीं हैं, मंगाया गया है कि लोग कैश आने का इंतजार करते रहे। दोपहर बाद पता चला कि कैश नहीं मिला। बाद में डाकघर ने पहले से रखे कैश में से दो-दो हजार बांट कर समस्या को थोड़ा करने की कोशिश की गई। बता दें कि करीब डेढ़ हजार पेंशनर डाकघर से जुड़े है। सहायक डाक अधीक्षक पीसी तिवारी ने बताया के बैंक से कैश नहीं आया। जिससे पेंशन नहीं मिल सकी। पहले से जो कैश बचा था उसी के काम चलाया गया।