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तेंदुए को जलाकर मारने के आरोप में पूरे गांव पर केस

Sat, 23 Dec 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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बाघराय इलाके में तेंदुए को जिंदा जलाकर मार डालने के मामले में वनरक्षक की तहरीर पर पूरे गांव पर अज्ञात में मुकदमा हो गया है। अब पुलिस जांच के बाद ऐसे लोगों को चिह्नित करने का प्रयास कर रही है जो इस घटना में शामिल थे। उधर, तेंदुए के हमले में घायल बसंतलाल और चंदन की हालत खराब देख उन्हें स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल रेफर किया गया है। 
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बाघराय थाना क्षेत्र के बूढ़ेपुर गांव में शुक्रवार सुबह तेंदुआ आ गया था। खबर फैलने पर पूरे गांव के लोग इकट्ठे हो गए। ग्रामीणों ने छह घंटे तक लाठी-डंडे लेकर उसे दौड़ा लिया। थकने के बाद जब तेंदुआ एक कुएं में फंस गया तो ग्रामीणों ने उसमें पुआल डालकर आग लगा दी। पुलिस और वनविभाग के कर्मचारी तमाशबीन रहे। जलने के कारण तेंदुए की मौत हो गई। कानपुर से तेंदुआ पकड़ने वाली टीम देर शाम टीम पहुंची, लेकिन उसकी जरूरत नहीं पड़ी। रात में कौशाम्बी डीएफओ भी मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद कुएं से तेंदुए का शव बाहर निकाला गया। सुबह उसके शव को प्रतापगढ़ पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। मामले में वनरक्षक महरानीदीन यादव की तहरीर पर बूढ़ेपुर गांव के लोगों पर वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है
बाघराय थाना क्षेत्र के बूढ़ेपुर गांव में तेंदुआ वनकर्मियों और पुलिसवालों की लापरवाही से मारा गया। भीड़ ने तेंदुए को पहले खूब दौड़ाया, ईंट-पत्थरों से मारा, कुत्तों से नोंचवाया, लाठियों से पीटा और फिर कुएं में फंसने पर जिंदा फूंक दिया। पूरे समय पुलिस और वन विभाग तमाशबीन की भूमिका में रहा। भीड़ के उग्र रवैये के बावजूद न तो अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई और न ही वन विभाग ने इस मामले में कोई पहल करने का प्रयास किया। 
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बाघराय के बूढ़ेपुर में तेंदुआ निकलने की सूचना पर पुलिस और वन विभाग के लोग समय से पहुंच गए थे। बावजूद इसके भारी भीड़ देख वह आगे नहीं बढ़ पाए। पुलिस ने कुछ प्रयास भी किया तो भीड़ ने ध्यान नहीं दिया। एक-दो बार भीड़ को हटाने का प्रयास हुआ भी तो लोग दूसरी तरफ से घूमकर पहुंच जाते थे। इस दौरान ग्रामीणों ने तेंदुए को खूब खदेड़ा। कुछ कुत्ते भी तेंदुए के पीछे लगे थे। तेंदुए ने कुत्तों पर हमला बोलने का प्रयास किया तो ग्रामीण उस पर हमला बोल देते। उसके झाड़ियों में छिपने पर ईंट-पत्थर फेंके जाते रहे। खदेड़े जाने के दौरान वह काफी थक गया था। थकान के कारण ही वह गांव के बगल बोरिंग के लिए खोदे गए कुएं में उतरकर वह छिप गया। इसी दौरान मौका पाकर लोगों ने उसमें पुआल डाला और आग लगा दी। इसके बाद उसमें लकड़ियां भी डाली गईं। ग्रामीणों के हटने पर वन विभाग ने पानी डालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अगर समय रहते वनकर्मियों और पुलिस ने जरूरी कदम उठाए और अफसरों को जानकारी दी होती तो तेंदुए को बचाया जा सकता था। 
एक-दूसरे पर तोहमत लगाते रहे 
बेकाबू हुई भीड़ ने जब तेंदुए को जलाने का प्रयास शुरू किया तो पुलिस और वन विभाग कर्मियों ने उन्‍हें रोकने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप शुरू कर दिया। वन विभाग के लोगों ने तो अपने ही संबंधित बीट प्रभारी को डराना शुरू कर दिया। उसे कहा जा रहा था कि अब उसे सस्पेंड होने से कोई नहीं रोक सकता। इस पर वह अपने साथियों से ही लड़ने लगा। उधर रेेंजर ने फोर्स बढ़ाने की बात भी कही, लेकिन दोनों विभाग एक दूसरे पर तोहमत लगाने लगे। 
वीडियोग्राफी के बीच डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम 
कुंडा। तेंदुए का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के बीच तीन डाक्टरों के पैनल ने किया। पोस्टमार्टम में उसके कुछ अंगों के पूरी तरह जल जाने और दम घुटने से मौत बताई गई है। पीछे की तरफ से उसका अंग जलकर खत्म हो गया है और ऊपर की तरफ रही पीठ भी जलकर काली हो गई थी। चिकित्सकों ने जांच में उसे मादा बताया है। 
बाघराय के बूढ़ेपुर में निकले तेंदुए को पोस्टमार्टम कुंडा रेंजर शिवशंकर सिंह की देखरेख में जिला अस्पताल में कराया गया। यहां तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। इस दौरान वीडीओ रिकार्डिग भी की जाती रही। पैनल में पशु चिकित्साधिकारी मुजाही बाजार डा.अनुराग यादव, गंगापुर पशुचिकित्साधिकारी सुशील कुमार व पशुचिकित्साधिकरी कोहंडौर शामिल रहे। इसके अलावा उसके पीछे के अंग काफी हद तक जले पाए गए। पोस्टमार्टम के दौरान कानपुर चिड़ियाघर के चिकित्सक डा.नासिर हुसैन के साथ ही पूरे वन विभाग का स्टाफ मौजूद रहा। पोस्टमार्टम के बाद तेंदुए का शव चिलबिला जंगल में ले जाकर जला दिया गया। 
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