पिछले छह दिनों में प्रतापगढ़ में जिस तरह से दो बार ट्रैक को नुकसान पहुंचाकर ट्रेन को पलटाने की कोशिश की गई, इसके पीछे किसी बड़ी साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता है। बड़े ही सुनियोजित तरीके से बड़ी घटना को अंजाम देने की कोशिश की जा रही है। गनीमत रही कि दोनों बार कोई हादसा नहीं हुआ। मगर, इसके बाद भी रेल प्रशासन गंभीर नहीं हैं। जिम्मेदार घटना की जांच करने के बजाए उसको छिपाने में जुटे हैं।
शनिवार को जिस जगह पर फिक्स प्लेट खोलकर गायब कर दिया गया। उससे थोड़ी ही दूरी पर छह दिन पहले 28 मार्च को चार स्लीपर गायब कर दिये गये थे। जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार मामले की पड़ताल करने की जरूरत नहीं समझे। उनकी इस लापरवाही का नतीजा था कि अराजकतत्वों ने इसका लाभ उठाते हुए शनिवार को दोबारा उसी ट्रैक को नुकसान पहुंचा दिया। इस बार उनके निशाने पर थी ट्रैक की फिक्स प्लेट जिसको निकालने के बाद हादसे की पूरी संभावना थी। रेल कर्मचारियों का कहना था कि अगर समय रहते हुए आरपीएफ वाले सक्रिय हो जाते तो शायद दूसरी घटना न होती। पीडब्ल्यूआई जितेन्द्र ने बताया कि घटना की रिपोर्ट आरपीएफ में दर्ज करा दी गई है।