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अब तक का सबसे बड़ा दुस्साहस

Fri, 26 Feb 2016 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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पुलिस थानों और चौकियों पर मारपीट, उपद्रव और उग्र भीड़ द्वारा तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं तो अक्सर होती रहती हैं, लेकिन बुधवार की रात मानिकपुर थाने पहुुंचकर बदमाशों ने जिस दुस्साहस का परिचय दिया वह प्रदेश में शायद पहली बार हुआ। लूट-छिनैती और हत्या की घटनाओं में वांछित रहे आधा दर्जन बदमाश पूरे थाने को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग और बमबाजी कर रहे थे। पुलिस को देखते ही रास्ता बदल देने वाले बदमाशों के ऊपर जैसे सनक सवार थी। वे एसओ को गालियां देने और ललकारने के साथ थाने की दीवारों, खिड़कियों, पेड़ों और जमीन के साथ हवा में भी गोलियां दाग रहे थे।
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उनके वारदात करने का तरीका नक्सलियों और आतंकवादियों की तरह था। करीब 15 मिनट तक फायरिंग कर उन्होंने पूरे इलाके को दहला दिया। उनके भीतर किसी तरह का भय नहीं था। थाने की दीवारों, खिड़कियों और पेड़ों पर बने गोलियों और बमों के निशान दहशत की कहानी बयां कर रहे थे। बदमाशों की फायरिंग से सहमे पुलिसकर्मी जहां के तहां दुबक गए। एसओ भी चंद कदम की दूरी पर ही बैरक में थे, लेकिन बमों के धमाके और गोलियों की तड़तड़ाहट के आगे किसी की भी उनसे मोर्चा लेने की हिम्मत नहीं हुई। थाने में संतरी ड्यूटी पर रहे होमगार्ड की जान लेने के बाद भी वह लगातार फायरिंग करते रहे। दूसरे दिन भी थाने के पुलिसकर्मियों के चेहरे पर घटना का खौफ तारी था। दूसरी तरफ पुलिस अधिकारी यह कहते रहे कि बदमाशों ने मात्र पांच मिनट ही फायरिंग की, लेकिन आसपास के लोगों ने बताया कि कम से कम 15 मिनट तक गोलियां और बमों के धमाके के गूंजते रहे।

वैसे तो मानिकपुर थाने में एक महिला सिपाही, एक एसओ, तीन एसआई, 21 सिपाहियों समेत कुल 26 पुलिसकर्मियों की तैनाती है, लेकिन इन दिनों थाने में मात्र एक एसओ, तीन एसआई और पांच सिपाहियों समेत कुल नौ पुलिसकर्मी ही हैं। बाकी लोगों की कहीं और ड्यूटी लगी हुई है। इनमें से कुछ दिन की ड्यूटी करते हैं तो कुछ रात में। बदमाशों के वारदात करने के तरीके को देखकर ऐसी आशंका जताई जा रही है कि शायद उन्हें भी पहले से इसकी जानकारी थी। बुधवार दिन में मानिकपुर एसओ परमेंद्र सिंह ने मोबाइल लूट के मामले में एक दुकानदार को उठाया था।
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उसने कुछ अहम राज उगले थे। बताते हैं कि शाम को बदमाशों ने एसओ को फोनकर दुकानदार को छोड़ने के लिए कहा। उनके इनकार करने पर गालीगलौज की और अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने कोे कहा। इसके बाद ही बदमाशों ने थाने पर हमले की योजना तैयार कर ली, लेकिन पुलिस ने उनकी धमकी को हल्के में लिया। इसकी जानकारी अफसरों को भी नहीं दी गई। रात साढ़े ग्यारह बजे फिल्मी स्टाइल में दो बाइकों पर सवार छह बेखौफ बदमाश असलहों और बमों से लैस होकर थाने आ पहुंचे और बमबाजी और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जिस समय हमलावर आए उस वक्त थाने में सिर्फ एक मुंशी था। एसओ और एसआई बैरक में थे। एक होमगार्ड संतरी ड्यूटी पर था। जिसे बदमाशों ने गोली मार दी। बगल मंदिर पर सो रहा चौकीदार और दूसरा होमगार्ड वहां से भाग निकले।
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