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तीन जगह से मिला था लूट का माल, कार्रवाई सिर्फ दो पर

Tue, 16 Feb 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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लाखों के धान लूट मामले में पुलिस का एक कारनाम फिर उजागर हुआ है।  तीन जगह लूट का माल मिला और कार्रवाई दो के खिलाफ ही की गई। मामले में राइसमिल संचालक व होमगार्ड को जेल जाना पड़ा, लेकिन प्राथमिक विद्यालय से धान बरामद होने के बाद भी शिक्षक को क्लीनचिट देकर छोड़ दिया गया। इलाहाबाद के मऊआइमा से दिल्ली की नरेला मंडी जा जा रहे 300 बोरी धान लदे ट्रक को बदमाशों ने चालक को बंधक बनाकर लूट लिया। ट्रक कब्जे में लेकर लुटेरे नारायनपुर गांव गए और वहां धान उतार कर ट्रक को रायबरेली बार्डर पर चालक के हवाले कर दिया गया। पांच दिन बाद लालगंज पुलिस अचानक नारायनपुर पहुंची और गांव के प्राथमिक विद्यालय के कमरे समेत होमगार्ड के घर और राइसमिल से लूट का सारा माल बरामद कर लिया।
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इसके बाद आरोपी होमगार्ड अमित पांडेय, राइसमिल संचालक मुमताज, ट्रक चालक रईस और प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को पूछताछ  के लिए कोतवाली बुलाया गया। यहां पुलिस ने खेल करते हुए शिक्षक को छोड़ दिया, जबकि राइसमिल संचालक, होमगार्ड तथा ट्रक चालक को जेल भेज दिया। आखिर सवाल यह उठता है कि प्राथमिक विद्यालय के कमरे तक लूट का माल कैसे पहुंच गया। कमरे में कई बोरी धान पांच दिनों तक पड़ा रहा। फिर भी शिक्षक की नजर कैसे नहीं पड़ सकी। विद्यालय का कोई न कोई कर्मचारी तो इस मामले में जरूर शामिल है।

जिसने धान को कमरे में रखवाने की मदद की। कमरे का ताला भी खुला और धान रखने के बाद फिर से बंद हो गया। इन सवालों का जवाब पुलिस के पास भी नहीं है। पुलिसिया कहानी में और भी किरदार शामिल हो गए हैं। जो तीन आरोपी जेल गए हैं उनमें शामिल होमगार्ड के दो रिश्तेदारों समेत दो अज्ञात को भी लूटकांड में शामिल होने का खुलासा किया गया है। पुलिस ने इनका नाम तो लूट के आरोपियों में डाल दिया और जिस प्राथमिक विद्यालय से माल बरामद हुआ वहां के शिक्षक को संदिग्ध भी नहीं बनाया।
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धान बरामद करने का श्रेय पुलिस खुद लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन असल में कहानी कुछ और ही है। ग्रामीणों की मानें तो लूट की शिकायत पर पुलिस ने मामले को दबा दिया और गैर जनपद के ट्रक चालक को घर भेज दिया गया। इसकी जानकारी होने पर मालिक ने ट्रक में लगे जीपीएस सिस्टम से लोकेशन खंगाली और अपने एक साथी को गांव भेज दिया। तीन दिन तक उसने सारी हकीकत खंगाली और जब उसे लूट का माल यहां होने की पुख्ता जानकारी हो गई तो उसने जिलाधिकारी को जानकारी दी। इसके बाद डीएम ने पुलिस को फटकार लगाते हुए नायब तहसीलदार सदानंद के साथ मौके पर जाने को कहा। तब पुलिस को इसकी भनक लग सकी।
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