जिले के ज्यादातर कोटेदार मनमानी पर उतारू हो गए हैं। राशन को बेचकर पैसा हजम करने के लिए माह में एक ही दिन राशन वितरण करते हैं। पात्र लोग कोटेदार की शिकायत करते थक जाते हैं, मगर अधिकारी न तो जांच करते हैं और न ही कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई। इससे उनमें किसी प्रकार का डर भय नहीं रहता है।
शासन की मंशा पर अधिकारी ही पानी फेर रहे हैं। गरीब परिवार को दो जून की रोटी मुहैया कराने के लिए शासन की ओर से प्रतिमाह गेहूं, चावल व चीनी सस्ते दाम पर उपलब्ध कराई जाती है। मगर अधिकारी इसकी जांच न करके वितरण करने की पूर्ण जानकारी कोटेदार पर थोप देते हैं। इसका फायदा उठाते हुए कोटेदार सरकारी राशन को बाजार में बेचकर मालामाल हो रहे हैं। गरीब राशन के लिए दर-दर भटकते रहते हैं। सूत्रों की मानेें तो प्रतिमाह गोदाम से कोटेदार राशन उठाते हैं, मगर उसे रास्ते में ही बड़े गल्ला व्यापारी के हाथ बंच देते हैं।
जनता के सामने चोरी छिपाने के लिए कोटेदार माह में एक दिन राशन का वितरण करते हैं। वह भी किसी को इसकी जानकारी नहीं देते हैं। सरकारी राशन की दुकान के बगल के लोगों को इसकी जानकारी लगती है तो वह इसका फायदा उठाते हैं। बाकी लोग जब हो हल्ला करते हैं तो पहुंचदार व्यक्ति को राशन व चीनी देकर कोटेदार इससे छुटकारा पा जाते हैं। गरीब जनता इसकी शिकायत लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के चौखट पर दर-दर भटकती रहती है। मगर उनकी सुनने के लिए जिम्मेदार अधिकारी तैयार नहीं होते हैं।