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मोबाइल की फ्रीक्वेंसी पकड़ पाने में नाकाम होगा सर्विलांस

Sat, 23 Apr 2016 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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क्राइम
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 पुलिस अधिकतर अपराध मोबाइल के जरिए ही सुलझाती है। सबसे पहले मोबाइल सर्विलांस पर लगाने के बाद उन्हें किस दिशा में बढ़ना है इसकी जानकारी हो जाती है। मगर, अब मोबाइल चोरों ने सर्विलांस की काट खोज ली है। चोरी के महंगे मोबाइल उपयोग में लाने के लिए महज कुछ रुपये ही खर्च करने होते हैं। मोबाइल के जरिए अपराध होता है तो कुछ अपराध अब मोबाइल के लिए किया जा रहा है। अक्सर चोरी गए मोबाइल सर्विलांस पर लगने के बाद मिल जाते हैं। इसका कारण यह होता है कि लोग सिम तो निकालकर फेंक देते हैं लेकिन आईएमआई नंबर मोबाइल की लोकेशन बता देता है।
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मोबाइल में नया सिम लगते ही संबंधित व्यक्ति पुलिस की पकड़ में आ जाता है। मगर, अपराध से जुड़े मोबाइल मैकेनिकों ने अब इसकी भी काट खोज ली है। सूत्रों की मानें तो चोरी के दर्जनों मोबाइल रिपेयरिंग की दुकानों पर पहुंचकर चेंज हो जा रहे हैं। महज 500 से 700 रुपये में मोबाइल का आईएमआई नंबर चेंज कर दिया जाता है। इसके बाद मोबाइल का सॉफ्टवेयर उड़ाकर उसमें दूसरा सॉफ्टवेयर लोड कर दिया जाता है। इतने के बाद मोबाइल में कुछ बचता ही नहीं है। उसे चाहे सर्विलांस पर लगाया जाए या फिर उसे खरीदने वाला ही उसे पा जाए। वह उसे किसी तरह से अपना साबित ही नहीं कर सकता। बाबागंज से चौक तक इस तरह के तमाम मोबाइल चेंज कर दिए जा रहे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि अभी उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। जल्द ही ऐसे मोबाइल मैकेनिकों की गुप्त सूची तैयार कराई जाएगी, ताकि उन पर नकेल कसी जा सके।
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