होटल गोयल रेजीडेंसी के रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज पुलिस को नहीं मिल रहे हैं। पुलिस अब घायलों व मृतकों के परिजनों का बयान दर्ज कर विवेचना में होटल प्रबंधन के खिलाफ दूसरी धाराएं भी बढ़ाएगी। रविवार को भी पुलिस अभिलेखों की तलाश करती रही। पुलिस ने शनिवार को होटल मालिक सुनील गोयल व दो मैनेजरों को जेल भेज दिया। रविवार को पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, ऊंची पहुंच के चलते बिना रजिस्ट्रेशन के ही डेढ़ साल से होटल और रेस्टोरेंट चल रहा था।
सुनील गोयल ने बताया कि उसने होटल के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन आगे की कार्रवाई की जानकारी उसे नहीं है। पुलिस प्रार्थना पत्र की खोजबीन करती रही, लेकिन वह भी नहीं मिला। सीओ सिटी एमपी सलोनिया ने बताया कि होटल की जमीन सुनील की पत्नी के नाम है। होटल से संबंधित एक भी अभिलेख कोई दिखा नहीं सका। ऐसे में विवेचना के दौरान होटल प्रबंधन के खिलाफ दूसरी धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा मृतक के परिजनों व घायलों का बयान भी विवेचक को दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।
बाबागंज स्थित होटल गोयल रेजीडेंसी में आग से दो युवतियों समेत दस लोगों की मौत हुई थी। युवतियों के शव के शिनाख्त में काफी समय लगा था। लालगंज के मिश्राइनपुर की रेशमा के परिजनों की मानें तो वह दवा लेने शहर आई थी। फिर वह होटल में कैसे रुक गई। यह परिवार के लोगों के साथ ही पुलिस के लिए अबूझ पहेली है। उसके पास होटल में रुकने के पैसे कहां से आए। यह कोई बताने वाला नहीं है। रविवार को मृत प्रियंका के शव की पहचान रांची से आकर उसके भाई ने की। वह इलाहाबाद में रहकर एमबीए की पढ़ाई कर रही थी। उसके भाई ने संभावना जताई कि नौकरी के सिलसिले में आई होगी और होटल में रुक गई। पुलिस की मानें तो काफी खोजबीन के बाद भी युवतियों के होटल में रुकने का राज नहीं पता लग सका।