जिले की करीब पांच सौ ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम के लिए फावड़ा व तसला खरीद में लाखों रुपये का घपला प्रकाश में आया है। कागज पर खरीदे गए यह सामान उन ग्राम पंचायतों से गायब हैं। पूर्व सीडीओ मनीष कुमार वर्मा के सामने यह मामला पहुंचा था। स्थानांतरण होने के बाद उनके जरिए दिए गए जांच के निर्देश की फाइल भी विकास भवन से गुम हो गई है। इस प्रकरण को पचाने की भरपूर कोशिश की जा रही है।
वित्तीय वर्ष 2014-2015 में करीब सभी 1105 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का काम कराने के लिए फावड़ा व तसले की खरीद हुई। इनमें से लगभग 500 ग्राम पंचायतों में खरीदा गया यह सामान गायब है। जबकि कागज पर इसका पूरा ब्यौरा दर्ज है। मामले को तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ने गंभीरता से लिया था। मनरेगा से जुड़े विभागीय सूत्र कहते हैं कि जांच शुरू होने से पहले सीडीओ का स्थानांतरण हो गया। उनके जाने के बाद यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया। हाल ही में शिकायतों के आधार पर उनके जरिए जांच के लिए दिए गए निर्देश की फाइल भी गायब हो गई है। बताते हैं कि उस फाइल में शिकायती पत्रों के साथ सीडीओ का निर्देश पत्र भी लगा था।