मुआर अधारगंज में सोमवार की सुबह हुई घटना पुलिस की उदासीनता से हुई। शिकायतों के बाद भी इलाकाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से नही लिया। कई बार उनके बीच मारपीट के साथ जानलेवा हमले की घटना हुई लेकिन पुलिस हर बार लचीला रवैया अपनाए रखा। इस वजह से दोनों पक्ष एक दूसरे पर दबदबा बनाने की समय-समय पर जोर आजमाइश करते रहे।
गांव में शेख इसरार के परिवार का हमेशा रुतबा रहा है। मुकीम पक्ष के लोगों ने जितनी भूमि पर कब्जा कर रखा है। उसे अपना बताते हुए इसरार पक्ष के लोगों ने पैमाइश कराई। इसके बाद मामला न्यायालय में चला गया। पुलिस रिकार्ड की मानें तो छह माह पहले दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर तकरार छिड़ी। जमीन के बहाने वर्चस्व की जंग भी उनके बीच छिड़ गई। 30 जुलाई 2014 को उनके बीच मारपीट की घटना हुई। इस मामले में पुलिस ने शांति भंग की आशंका में दोनों पक्षों का चालान कर दिया।
इसके बाद 21 सितंबर 2014 को फिर उनके बीच मारपीट और जानलेवा हमला हुआ। दोनों पक्षों की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर निरोधात्मक कार्रवाई की। घायलों की मानें तो मुकीम ने कई बार सीओ रानीगंज के साथ ही एसओ से भी अनहोनी की आशंका जताते हुए शिकायत की लेकिन सभी ने उसकी बात सुनने के बाद अनसुनी कर दिया। इससे हमलावर पक्ष के लोगों का हौसला बढ़ता गया। वे एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए हमेशा कोशिश करते रहते थे। दोनों पक्षों की तनातनी की जानकारी पुलिस को भी थी लेकिन समय रहते पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।