शासन से किसानों की आर्थिक मदद के लिए आई राहत राशि कमिशभनर बनकर जालसाज युवक ने लूट ली। जब तक अधिकारी चेतते तब तक सदर तहसील के 40 हजार रुपये खाते से निकल चुके थे। इसकी भनक लगने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। अफसर बैंक के साथ पुलिस अधिकारियों के पास भागदौड़ करने लगे।
बुधवार को सदर तहसीलदार चंद्रेश सिंह के सीयूजी नंबर पर एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कमिशभनर बताने हुए तहसीलदार को हड़काया और शासन से किसानों को मिली राहत राशि के बारे में पूछताछ शुरू कर दी।
तहसीलदार से राहत राशि रखने वाले बैंक का नाम और मैनेजर का नंबर पूछा। फिर एक खाता नंबर देते हुए कहा कि तत्काल जाकर इसमें तीन लाख रुपये ट्रांसफर कराओ। इस दौरान उसने मैनेजर का नंबर भी ले लिया। बताया जाता है कि कमिशभनर बनकर फोन करने वाले ने मैनेजर से भी बात की। कमिशभनर बने जालसाज ने इलाहाबाद बैंक के मैनेजर को फोन कर सदर तहसील के खाते की जमा राशि से तीन लाख रुपए अपने बताए खाते में ट्रंासफर करने को कहा। कमिशभनर का नाम सुनते ही मैनेजर ने रुपये उसके खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसी दौरान उसी नंबर से रानीगंज के तहसीलदार के पास भी फोन गया। जालसाज कमिशभनर का आदेश सुनते ही वह भी भागे-भागे बैंक गए और तीन लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए लिखापढ़ी कर दी।
इधर, शंका होने पर सदर तहसीलदार चंद्रेश सिंह अधिकारियों को मामले से अवगत कराते हुए बैंक गए। वहां पता चला कि मैनेजर ने रुपये ट्रांसफर कर दिए हैं। उस खाते की जानकारी की गई तो पता चला कि वह स्टेट बैंक का है। यह सुनते ही तहसीलदार भागकर स्टेट बैंक पहुंचे। वहां पता चला कि उस खाते से तत्काल 40 हजार रुपये निकल चुके हैं। यह सुनते ही सभी के होश उड़ गए। तत्काल उस खाते को बंद कराया गया। इस बीच दूसरे तहसीलदारों से पूछताछ होने लगी। रानीगंज तहसीलदार ने तत्काल बैंक पहुंचकर रुपये ट्रांसफर करने की कवायद पर रोक लगा दी और अपना आदेश फाड़ दिया। इस बात की जानकारी मिलते ही कमिशभनर की बैठक में गए जिलाधिकारी नेे सभी को कड़ी फटकार लगाई। मंडलायुक्त से बात की तो मामला साफ हो गया। सदर तहसीलदार जालसाज के बताए बैंक एकाउंट की जानकारी के लिए भागकर इलाहाबाद पहुंचे। खबर भेजे जाने तक वह बैंक से खाताधारक व गवाहों की छानबीन करते रहे। इस बाबत इलाहाबाद के बैंक मैनेजर देवजीत बलुआ से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।