सरकार ने 31 जुलाई तक पंचायतों को अपना प्लान देने को कहा है।
जिले के मनरेगा जॉब कार्ड धारकों को एक माह से मजदूरी नहीं मिल रही है। इसकी वजह अफसरों और बाबुओं का हिसाब नहीं देना बताया जा रहा है। दरअसल, मनरेगा के तहत जिले में क्षेत्र पंचायतों और ग्रामपंचायतों ने अंधाधुंध काम तो करा दिया, मगर जिले के अधिकारी इसका हिसाब देने में फेल हो गए हैं।
मनरेगा के तहत क्षेत्र पंचायतों में होेने वाले विकास कार्यों पर डीएम ने रोक लगा रखी है, मगर ग्राम पंचायतों में इन दिनों तेजी से काम हो रहा था। इधर लगभग एक माह से काम करने वाले मजदूरों का मेहनताना नहीं मिल रहा है। जिले के 47,259 जाबकार्ड धारकों का लगभग एक करोड़ रुपये बकाया है। ग्राम प्रधानों ने पहले ब्लाक कर्मियों पर अपने गुस्से का इजहार किया, प्रधानों और मजदूरों को ऐसा लगा कि ब्लाक में फीडिंग नहीं होने के कारण भुगतान नहीं हो रहा है। मगर ऑनलाइन फीडिंग में सब कुछ दुरुस्त मिलने पर जिला स्तरीय अधिकारियों से संपर्क किया गया तो पता चला कि केंद्र सरकार ने मजदूरी के भुगतान पर प्रतिबंध लगा दिया है।
इससे जॉब कार्ड धारक कभी प्रधान तो कभी ब्लाक का चक्कर लगा रहे हैं। मजदूरी नहीं मिलने से नाराज जॉब कार्ड धारकों ने काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। डीसी मनरेगा ने स्वीकार किया कि केंद्र सरकार ने मजदूरी भुगतान पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि यह रोक कोई एक जिले के लिए नहीं है, बल्कि प्रदेश में मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
60-40 अनुुपात का नहीं हुआ पालन
मनरेगा के तहत जो भी विकास कार्य होगा उसमें 60 प्रतिशत मजदूरी का भुगतान करते हुए कच्चा कार्य कराया जाना है और 40 प्रतिशत धनराशि सामग्री में खर्च करनी है। मगर जिले के सांगीपुर, संडवा चंद्रिका और बाबागंज क्षेत्र पंचायतों में मनरेगा का धन खर्च करने में व्यापक अनियमितता बरती गई है। इन ब्लाकों में अनुपात की अवलेहना करते हुए सामग्री खरीद में ही अधिकांश धनराशि खर्च कर ली गई है। यही वजह है कि अधिकारी और बाबू यह अनुपात दुरुस्त नहीं कर पा रहे हैं।