ऐतिहासिक भरत मिलाप को लेकर रविवार शाम पूरा शहर जशभन में डूब गया। शाम होते ही शहर सतरंगी रोशनी से रोशन हो उठा। डिजिटल लाइटिंग गेट व सतरंगी झालरों से सतरंगी नजारा देखते ही बन रहा था। घंटाघर से चारों दिशाओं तक आकर्षक लाइटिंग से शहर में अवधनगरी जैसा नजारा था। जयश्रीराम के जयकारे से पूरा वातावरण गूंजायमान हो रहा था। देरशाम कलात्मक झांकियों का आगाज हुआ तो रात में कलात्मक झांकियों ने मन मोह लिया। देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शहर का पूरा वातावरण राममय हो गया।
ऐतिहासिक भरत मिलाप की तैयारी को लेकर दो दिन पूर्व से समिति के संरक्षक समाजसेवी रोशनीलाल ऊमरवैश्य व अध्यक्ष श्यामशंकर सिंह की देखरेख में कर्मचारी जुटे हुए थे। भरत मिलाप के दिन तैयारी को लेकर भोर से ही अन्य दिनों की अपेक्षा और तेजी दिखी। कई टीमें पूरे शहर में लगाई गई थीं। लाइटिंग, सजावट, बल्लियोें को गाड़ने, घंटाघर को सजाने में सभी को कार्य सौंपा गया था। घंटाघर से होकर गुजरने वाली सभी चारों मार्गों पर आकर्षक लाइटिंग की गई थी। चारों तरफ जगह-जगह डिजिटल लाइटिंग वाले हाईटेक गेट लगाए गए थे। जिससे झांकी के अनुरूप रोशनी बिखेरी जा सके।
इसके अलावा दूर तक बांस व बल्लियों को सहारे लाइटिंग, झालर, झूमर, ट्यूब लाइट, एलईडी लाइट लगाई गई थी। शाम करीब पांच बजे तक घंटाघर में लाइटिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया। शाम छह बजे तक सजावट के सभी कार्य पूर्ण हो चुके थे। 7 बजे के बाद जैसे ही लाइटिंग शुरू की गई तो पूरा शहर सतरंगी रोशनी से जगमग हो उठा। भक्तिमय गीत बजे तो पूरा शहर मानो जैसे अवधपुरी सा लगने लगा। घंटाघर का नजारा बहुत ही आकर्षक दिख रहा था। शाम साढे़ सात बजे के बाद लोग मेला देखने के लिए घरों से निकलने लगे। रात आठ बजे के बाद मेला क्षेत्र में भीड़ बढ़ने लगी। रामलीला समिति की ओर से पहली झांकी भगवान राम, मां जानकी, लक्ष्मण व भक्तराज हनुमान जी की निकली।
भगवान राम की महिमा पर आधारित गीत बजे तो पूरा वातावरण राममय हो गया। रामदरबार की इन झांकियोें को देखने के लिए शहर के लोग उमड़ पड़े। देखते ही देखते मेले की रंगत छाने लगी। शहर की सभी गलियों और सड़कों पर भीड़ ही भीड़ नजर आ रही थी। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद रात करीब 10 बजे कीर्ति मंडल, भरत दल, हनुमान दल, लवकुश दल की झांकियां निकलना शुरू हो गईं। झाकियों एवं दलों की कलात्मकता देखने लायक थी। झांकी मंचन के बीच भक्तिमय गीत से पूरा वातावरण राममय हो गया। देर रात तक झाकियों के निकलने का सिलसिला जारी रहा।